भोपाल समाचार, 9 फरवरी 2026: पॉलिटिक्स के कारण देश तरक्की करता है और पॉलिटिक्स के कारण ही बर्बाद हो जाता है। पॉलिटिक्स के कारण भोपाल का विकास हुआ लेकिन इसी पॉलिटिक्स के कारण भोपाल की बिजली कंपनी 1769 करोड़ के घाटे में चल रही है। यह नंबर जबलपुर की तुलना में दोगुना है। जबकि भोपाल के दूसरे बड़े शहर इंदौर की बिजली कंपनी 121 करोड़ के फायदे में है।
बिजली कंपनियों की परफॉर्मेंस रैंकिंग रिपोर्ट में खुलासा
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गई परफॉर्मेंस रैंकिंग रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में तीनों कंपनियों के पिछले साल के घाटे के आंकड़े और बिल वसूली क्षमता (बिलिंग एफिशिएंसी) भी जारी की गई है। इसके अनुसार मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी लगभग 30% बिजली बिलों की वसूली भी नहीं कर पाती। उसकी बिलिंग एफिशिएंसी सिर्फ 73.04% है। कंपनी की यह स्थिति तब है जब केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग योजनाओं के तहत बिजली चोरी रोकने के लिए अंडरग्राउंड केबल बिछाने, स्मार्ट मीटर लगाने और फीडर सेपरेशन जैसे कई काम किए जा रहे हैं।
भोपाल को स्मार्ट मीटर नहीं स्ट्रांग सिस्टम चाहिए
मजेदार बात देखिए, मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंदर पॉलिटिक्स चल रही है, कर्मचारी और अधिकारी एक दूसरे को पीछे धकेलना के लिए अपने संपर्क के नेताओं का उपयोग कर रहे हैं और नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए टेक्निकल लॉस के नाम पर फ्री बिजली सप्लाई दे रहे हैं। और जब इस बात का खुलासा होने वाला है तो एक नया नॉरेटिव बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि, 100% स्मार्ट मीटरिंग से सब कुछ ठीक हो जाएगा। जबकि वास्तविकता यह है कि, सब कुछ ठीक करने के लिए बिजली कंपनी के भीतर की व्यवस्था और पॉलिटिक्स को ठीक करना होगा। यदि भ्रष्टाचार पर कंट्रोल करेंगे तो, बड़ी संख्या में पुरान तार, जर्जर लाइनें और ओवरलोडेड ट्रांसफॉर्मर की प्रॉब्लम अपने आप सॉल्व हो जाएगी।

.webp)