जबलपुर, 30 दिसंबर 2025: मध्य प्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत जनशिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा है कि जनशिक्षक और BAC पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह उनकी याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
जिला परियोजना समन्वयक के आदेश पर आपत्ति
मामला जबलपुर जिले से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता अजय सिंह, संतोष झरिया, संजय केशरवानी और अन्य ने मध्य प्रदेश शासन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। माननीय जस्टिस अजय सेठ ने इस पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पहले से जनशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन 15 दिसंबर 2025 को जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र जबलपुर ने एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें समग्र शिक्षा अभियान के तहत विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जनशिक्षक पदों के लिए नए आवेदन आमंत्रित किए गए। इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 रखी गई, और इसमें उच्च श्रेणी शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक, 52 वर्ष की उम्र वाले पूर्व कर्मचारी भी आवेदन कर सकते थे।
जनशिक्षक की नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति: एक शब्द के कारण विवाद
इससे पहले, 10 सितंबर 2025 को भी रिक्त पदों की भर्ती के लिए आदेश जारी हुआ था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एक ही ऑफिस से दो अलग-अलग आदेश जारी करना नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने 10 सितंबर 2025 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनशिक्षक की नियुक्ति को प्रतिनियुक्ति नहीं माना जाएगा, और इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उनका वेतन भी उसी पद से निर्धारित होगा। फिर भी, कार्यरत जनशिक्षकों के पदों को रिक्त दिखाकर नए आवेदन मांगना गलत है। शासन के नियमों के मुताबिक, पूर्व से कार्यरत जनशिक्षकों को प्रतिनियुक्ति मानकर नहीं हटाया जा सकता।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि, यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया इस याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
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