DFO नेहा श्रीवास्तव ने विधायक पर दबाव बनाने झूठी शिकायत की थी? या विधायक के साथ डील हो गई

भोपाल, 9 नवंबर 2025
: बालाघाट जिले में विधायक अनुभा मुंजारे और डीएफओ नेहा श्रीवास्तव के बीच का विवाद सरकारी डॉक्यूमेंट में खत्म और मीडिया में फिर से ओपन हो गया है। वन विभाग के दो सीनियर IFS ऑफिसर्स की जांच रिपोर्ट कई प्रश्न छोड़ जाती है। इसमें सबसे बड़ा प्रश्न है कि मध्य प्रदेश में ऐसा क्या चल रहा है जिसको छुपाया जा रहा है। 

फ्लैशबैक: जहां से मामला चर्चा में आया

दिनांक 3 सितंबर 2025 को डीएफओ नेहा श्रीवास्तव ने आरोप लगाया था कि 16 अगस्त को विधायक मुंजारे ने उन्हें वन विभाग के रेस्ट हाउस में मिलने बुलाया था। मुलाकात के दौरान विधायक ने उनसे दो से तीन पेटी रकम की मांग की थी। एक आईएफएस अधिकारी के लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद बालाघाट की राजनीति में हलचल मच गई थी। विधायक अनुभा मुंजारे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। कांग्रेस विधायक पर लगे इन आरोपों की गूंज भोपाल तक पहुंची। मध्यप्रदेश शासन के वन मंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दिए। 

मंत्रालय ने दो सीनियर आईएफएस ऑफीसर्स को जांच के लिए भेजा

वन विभाग के मुख्य सचिव अतुल कुमार मिश्रा ने राज्यपाल की अनुमति से दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। इसमें 1997 बैच की अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक कमलिका मोहन्ता और 2010 बैच की वन संरक्षक अंजना सुचिता तिर्की को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। टीम को दो सप्ताह के भीतर राज्य शासन को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।

जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बालाघाट के फॉरेस्ट हाउस में डीएफओ नेहा श्रीवास्तव से दो-तीन पेटी रकम मांगने के विधायक अनुभा मुंजारे के खिलाफ लगाए गए आरोप की किसी भी गवाह ने पुष्टि नहीं की है। विधायक अनुभा मुंजारे की ओर से इस जानकारी को मीडिया तक पहुंचाया गया और यह प्रचारित किया गया कि विधायक अनुभा मुंजारे को क्लीन चिट मिल गई है। 

जांच रिपोर्ट अधूरी, नई जांच जरूरी

1997 बैच की अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक कमलिका मोहन्ता और 2010 बैच की वन संरक्षक अंजना सुचिता तिर्की द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट अधूरी है। गवाहों द्वारा शिकायत की पुष्टि नहीं किया जाना, जांच का अंतिम निर्णय नहीं हो सकता। जांच तब पूरी होगी जब यह पता चलेगा कि शिकायत सही थी या गलत। क्या डीएफओ ने अपने पति को बचाने के लिए विधायक पर शिकायत के माध्यम से प्रेशर बनाया था। या फिर विधायक ने अवैध वसूली के लिए डीएफओ नेहा श्रीवास्तव के पति के खिलाफ लिखा पड़ी कर दी थी। 

1997 बैच की अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक कमलिका मोहन्ता और 2010 बैच की वन संरक्षक अंजना सुचिता तिर्की अथवा उनका निर्देश देने वाले अधिकारी यदि यह सोचते हैं कि, बात यहां पर खत्म हो गई है, तो वह गलत सोचते हैं। पब्लिक अब प्रतिप्रश्न भी करती है एवं न्याय और निर्णय की स्थिति को भी जानती है। बताया जा रहा है की पूरी जांच बंद कमरे में हुई है। इस जांच का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है।
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