कटनी, 9 नवंबर 2025: एक पुराने फ्रिज के अंदर छुपे हुए अनजाने खतरे ने एक मासूम बच्चे की जिंदगी को दांव पर लगा दिया। कटनी के रहने वाले 14 साल के आर्यन मिश्रा ने जब शाम के वक्त फ्रिज का दरवाजा खोला, तो अचानक जोरदार ब्लास्ट हो गया। इस धमाके ने उसके चेहरे को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया। तेज आवाज सुनकर दौड़ी हुई मां ने बेटे को खून से लथपथ देखा, तो खुद बेहोश होकर गिर पड़ीं। पड़ोसियों की तत्परता ने समय पर बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर्स ने करिश्माई सर्जरी से उसकी जान बचाई। आज, चार दिन बाद, आर्यन की हालत में सुधार आ रहा है, लेकिन रिकवरी का सफर अभी लंबा है।
घटना 5 नवंबर की शाम करीब 5:30 बजे की है। आर्यन अपनी मां के साथ घर पर थे। थकी हुई मां कमरे में आराम करने चली गईं, तभी किचन से धमाके जैसी आवाज गूंजी। मां ने सोचा शायद कहीं बम फटा हो, लेकिन बाहर निकलते ही खौफनाक मंजर सामने आ गया, बेटा फ्रिज के पास बेहोश पड़ा था, मुंह फटा हुआ और खून बहता हुआ। यह दृश्य देखते ही मां भी चक्कर खाकर गिर पड़ीं। इसी बीच, शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने मां-बेटे को संभाला। बच्चे को फौरन कटनी के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया, जबकि मां को होश आने पर घर पर ही डॉक्टर्स ने देखा।
हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर्स के होश उड़ गए। आर्यन का पूरा चेहरा फट चुका था, नाक, मुंह और जबड़े की हड्डियां चूर-चूर। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जबलपुर रेफर कर दिया गया। डेढ़ घंटे के अंदर एम्बुलेंस से दमोह नाका स्थित बड़ेरिया मेट्रो हॉस्पिटल पहुंचे। यहां ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. राहुल चतुर्वेदी की अगुवाई में प्लास्टिक सर्जरी टीम ने कमान संभाली। जांच में पता चला कि चेहरे की करीब 108 हड्डियां क्रैक हो चुकी थीं। बच्चे की सांस नली में गैस घुस गई थी, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया। डॉक्टर्स ने गले में छेद कर वेंटिलेटर लगाया और ढाई घंटे की जद्दोजहद के बाद सर्जरी पूरी की। प्लेट्स लगाकर टूटी हड्डियां जोड़ी गईं, लेकिन चुनौतियां कम न थीं—लगातार बहता ब्लड रोकना और इतने छोटे बच्चे का चेहरा संवारना, दोनों ही रिस्की थे।
डॉ. चतुर्वेदी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में बताया, "हादसे में नाक, मुंह और जबड़े की हड्डियां कई टुकड़ों में बंट गई थीं। त्वचा फट चुकी थी, और सांस नली ब्लॉक हो गई थी। ऐसी स्थिति में जान बचाना ही पहली प्राथमिकता थी। ऑपरेशन के दौरान वेंटिलेटर पर रखा गया बच्चा अब स्टेबल है। अभी ओरल लिक्विड डाइट पर है, और 3-4 दिनों में बोलना शुरू कर देगा। रिकवरी में समय लगेगा, लेकिन उम्मीद की किरण है।" 8 नवंबर को आर्यन को वेंटिलेटर से हटा दिया गया, जो परिवार के लिए बड़ी राहत है।
आर्यन के पिता, कटनी पुलिस में एएसआई विवेक कुमार मिश्रा, इस हादसे से सदमे में हैं। उन्होंने बताया, "घटना किचन में ही हुई। फ्रिज 15 साल पुराना था, कई बार रिपेयर भी कराया। फ्रीजर में बर्फ जम जाती थी, जिसे बंद रखते थे। कंट्रोलर भी खराब हो चुका था। सोचा था जल्द नया फ्रिज लेंगे, लेकिन इससे पहले यह हो गया। शायद गैस प्रेशर से बर्फ में ब्लास्ट हुआ।" परिवार अभी जबलपुर में ही डटा है, और घर पर लॉक लगा रखा है। पुलिस जांच में भी पुराने फ्रिज की खराबी पर फोकस है।
यह घटना पुराने अप्लायंसेज के खतरे की याद दिलाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर मेंटेनेंस और रिप्लेसमेंट जरूरी है, खासकर बच्चों के आसपास। आर्यन की बहादुरी और मेडिकल टीम की मेहनत ने एक जिंदगी को नई उमंग दी है। हम सबकी प्रार्थना है कि वह जल्द स्वस्थ होकर मुस्कुराए। परिवार के लिए समर्थन और जागरूकता ही अब सबसे बड़ा सहारा है।

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