पॉलिटिक्स भी बड़ी अजीब चीज होती है। कभी नेताओं की घोषणाओं का अधिकारी फायदा उठाते हैं तो कभी अधिकारियों की सक्रियता का क्रेडिट नेता ले जाते हैं। गोविंदपुरा विधानसभा में हताईखेड़ा सिविल अस्पताल को ताले में बंद बिल्डिंग से लेकर वर्तमान की स्थिति तक भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनीष शर्मा ने पहुंचाया और आज जब अस्पताल ठीक प्रकार से संचालित होने लग गया है तो स्थानीय विधायक श्रीमती कृष्णा गौर ने क्रेडिट लूटने के लिए सरकारी एजेंसी के माध्यम से प्रेस रिलीज जारी करवा दिया।
सीएमएचओ शर्मा ने 13 जुलाई को छापामार कार्रवाई की थी
हताईखेड़ा सिविल अस्पताल लंबे समय से अस्तित्व में था और श्रीमती कृष्णा गौर इस क्षेत्र की विधायक भी थी परंतु उन्होंने कभी ध्यान नहीं दिया। अस्पताल का भवन बना हुआ था। अस्पताल में स्टाफ की पोस्टिंग भी थी परंतु मरीज का इलाज नहीं होता था। अस्पताल में ताला डालकर स्टाफ गायब हो जाता था। दिनांक 13 जुलाई को भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनीष शर्मा ने यहां पर छापामार कार्रवाई की। पता चला कि अस्पताल में 40 लोगों का स्टाफ है लेकिन फिर भी ताला लगा हुआ है। लोकल के लोगों को तो पता ही नहीं था कि इस अस्पताल में इतना स्टाफ है और यह अस्पताल रात में भी खुलता है। उन्होंने हमेशा इस अस्पताल को शाम होते ही ताला बंद होते देखा था। सीएमएचओ शर्मा ने संबंधित अधिकारियों और डॉक्टर को नोटिस जारी किया और यह सुनिश्चित किया कि अस्पताल रात में खुले। (पूरा समाचार यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।) शनिवार दिनांक 6 सितंबर 2025, वह पहला दिन है जब यहां पर एक शिशु का जन्म हुआ। सेक्टर-बी पटेल नगर रायसेन रोड निवासी श्रीमती सोनल बंसल पति सुनील बंसल ने सुबह 6:38 पर बेटी को जन्म दिया।
विधायक श्रीमती कृष्णा गौर का दावा
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने अपने सरकारी जनसंपर्क अधिकारी श्री शिवम शुक्ला के माध्यम से प्रेस रिलीज जारी करवाया। इसमें लिखा है कि, श्रीमती कृष्णा गौर ने जल्द से जल्द प्रसूति वार्ड शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिसके परिपालन में सिविल हॉस्पिटल में प्रसूति वार्ड शुरु किया गया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बैठक में कहा था कि अस्पताल का विस्तार कर इसे एक आदर्श चिकित्सालय के रूप में विकसित किया जाए, जिससे आमजन को बेहतर इलाज और सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने निर्देश दिए थे कि महिला मरीजों की चिकित्सा और देखभाल को प्राथमिकता दी जाए और अस्पताल स्टाफ मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखें।
श्रीमती कृष्णा गौर ने बड़ी चतुराई के साथ न केवल सीएमएचओ शर्मा की मेहनत का क्रेडिट चुरा लिया बल्कि अपनी निष्क्रियता पर भी पर्दा डाल दिया। क्योंकि यदि श्रीमती कृष्णा गौर सक्रिय होती तो 13 जुलाई को अस्पताल में ताला नहीं मिलता।

