BHOPAL NEWS - सिविल अस्पताल गोविंदपुरा हताईखेड़ा में ताला, गांधीनगर में डॉक्टर गायब मिला

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनीष शर्मा के गाल पर उनके ही सिस्टम का तमाचा उसे समय दिखाई दिया जब वह स्वयं सिविल अस्पताल गोविंदपुरा हताईखेड़ा पहुंचे। यहां 40 लोगों का स्टाफ है लेकिन अस्पताल में ताला मिला। गांधी नगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का ताला तो खुला था लेकिन डॉक्टर नहीं था। CMHO शर्मा इसके बाद भी कुछ नहीं कर पाए। नोटिस जारी करके सभी संबंधित डॉक्टरों से पूछा है कि आखिर तुम लोगों ने ऐसा क्यों किया। 

भोपाल में चिकित्सा सेवाओं की जांच कोई नहीं करता

भोपाल में चिकित्सा सेवाओं की जांच करने का काम सामान्य तौर पर कोई नहीं करता। मंत्री और मुख्यमंत्री भी नहीं करते, क्योंकि सबको पता है, सिस्टम की पोल खुल जाएगी और वह कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे। यदि कोई कार्रवाई करता है तो डॉक्टर लोग हड़ताल पर चले जाते हैं। लेकिन भोपाल के नए CMHO डॉक्टर मनीष शर्मा ने यह जोखिम उठाया और राजधानी की रात्रि कालीन चिकित्सा सेवाओं का जायजा लेने के लिए निकल पड़े। उन्होंने रात 8 से 9:00 बजे दौरा किया।

गांधी नगर स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर गायब मिला

रात 8.00 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांधीनगर पहुंचे। यहां पर डॉक्टर गायब था। डॉक्टर शर्मा ने ड्यूटी डॉक्टर्स की उपस्थिति की जानकारी ली। पता चला कि जिस डॉक्टर की नाइट ड्यूटी है आज वह देर से आएंगे और रिलीविंग डॉक्टर, रिलीविंग दिए बिना ही चले गए हैं। प्राइवेट अस्पतालों पर तत्काल ताला लगा देने वाले CMHO शर्मा अपने डिपार्टमेंट में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद भी कुछ नहीं कर पाए। यहां तक की अपने प्रेस रिलीज में दोनों डॉक्टरों के नाम तक नहीं लिख पाए। बस इतना बताया है कि, खंड चिकित्सा अधिकारी को सम्बन्धित चिकित्सकों के विरुद्ध कारण बताओं नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सिविल अस्पताल गोविंदपुरा हथाईखेड़ा में ताला मिला 

इसके बाद डॉक्टर शर्मा सिविल अस्पताल गोविंदपुरा हथाईखेड़ा पहुंचे। यहां पर 40 से ज्यादा लोगों का स्टाफ है लेकिन रात 9:00 बजे से पहले ही यहां पर ताला लग गया था। लोकल के लोगों को तो पता ही नहीं है कि यह सिविल अस्पताल रात में भी खुलता है। डॉक्टर शर्मा को मौके पर पंचनामा बनाना चाहिए था परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। कम से कम सिविल अस्पताल के अधीक्षक को अपने ऑफिस में अटैच तो करना ही चाहिए था, लेकिन डॉक्टर शर्मा कुछ नहीं कर पाए। अधीक्षक सहित पूरे स्टॉफ को नोटिस जाकर भी करके पूछा जाएगा कि आखिर निरीक्षण वाले दिन ताला क्यों लगा था?

CMHO नोटिस को कड़ी कार्यवाही कहते हैं

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ मनीष शर्मा नोटिस को कड़ी कार्रवाई कहते हैं। जबकि नोटिस एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। संबंधित कर्मचारी लिफाफे में इसका जवाब दे देता है और बात खत्म हो जाती है। ज्यादातर नोटिस जारी ही इसलिए किए जाते हैं ताकि लिफाफे में जवाब मिल सके। मीडिया में हीरो बनने के लिए डॉक्टर शर्मा ने अपने प्रेस रिलीज में कहा है कि रात के समय में अस्पतालों में आकस्मिक चिकित्सा के पर्याप्त इंतजाम न मिलने पर संबंधितों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही की जाएगी। आम नागरिकों को 24*7 स्वास्थ्य सेवाएं नहीं देने के लिए प्रशासनिक विफलता के उत्तरदायी संस्था प्रभारियों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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