मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भारती के लिए कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित Group-2, Sub Group-4 (2022) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) पर आरोप लगे हैं कि उसने जानबूझकर मेरिट सूची में अयोग्य उम्मीदवारों को शामिल किया और योग्य अभ्यर्थियों को 'अपात्र' घोषित कर दिया।
मेरिट लिस्ट वालों के पास में डिग्री ही नहीं थी
स्वयं को योग्य होने का दावा करने वाले एक अभ्यर्थी भगवान सिंह के अनुसार, 86 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में MPESB ने मेरिट सूची में ऐसे 76 उम्मीदवारों को शामिल किया, जिनके पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता (नगर नियोजन में डिग्री) ही नहीं थी। इसके विपरीत, जिन योग्य अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की और सफल अभ्यर्थियों की सूची में स्थान बनाया, उन्हें बाद में MPESB द्वारा जारी एक परिपत्र के आधार पर 'अपात्र' करार दे दिया गया।
व्यापम ने 2017 में भी यही गड़बड़ी की थी
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब MPESB पर इस तरह के आरोप लगे हैं। इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2017 में भी आयोजित की गई थी, जिसमें 64 पदों के लिए मेरिट सूची जारी की गई थी। उस समय भी 63 अयोग्य उम्मीदवारों को मेरिट सूची में शामिल किया गया था, जिसके कारण 64 में से 63 पद रिक्त रह गए थे। हैरानी की बात यह है कि पांच साल बाद भी MPESB ने अपनी गलतियों से सबक नहीं लिया और 2022 की भर्ती में भी वही गड़बड़ी दोहराई गई।
मध्य प्रदेश कनिष्ठ सेवा नियम 2013 के नियम 5(3) का उल्लंघन
यह कार्यवाही MP कनिष्ठ सेवा नियम 2013 के नियम 5(3) का सीधा उल्लंघन है, जो स्पष्ट करता है कि "अर्हकारी सूची में केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही रखा जाएगा"। MPESB ने अपनी ही भर्ती नियमावली की धारा 24(ङ) की भी अवहेलना की, जो कहती है कि यदि कोई अभ्यर्थी चयन के लिए आवश्यक तथ्य छिपाता है तो उसकी अभ्यर्थिता रद्द की जाएगी। हैरानी की बात यह है कि एक अयोग्य अभ्यर्थी को रद्द करने के बजाय रीवा में पटवारी पद पर ज्वाइनिंग भी दे दी गई।
4337 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए फिर भी 88% पद रिक्त रह गए
इस गड़बड़ी का नतीजा यह हुआ कि 88% पद रिक्त रह गए और सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए। RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 4337 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए थे और याचिकाकर्ता भी उसी अधिकृत सूची में शामिल हैं, फिर भी MPESB और नगरीय प्रशासन विभाग (UADD) ने उन्हें काउंसलिंग से बाहर कर दिया।
मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि मुख्य याचिकाकर्ता की उम्र 40 वर्ष है, जो सरकारी नौकरी के लिए अंतिम अवसर है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में हुई यह अनियमितता न केवल उनके करियर, बल्कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि त्रुटिपूर्ण मेरिट सूची को रद्द करके केवल योग्य उम्मीदवारों की नई सूची जारी की जाए और उन्हें तत्काल नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
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