BNS 21, IPC 83 - 7 - 12 वर्ष के बच्चे द्वारा किया गया अपराध, कब माफी योग्य होगा, जानिए

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Legal general knowledge and law study notes 

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 82, एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा, 20 स्पष्ट रूप से कहती है कि सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा किया गया अपराध सभी विधियों में क्षमा योग्य होता है, लेकिन सात वर्ष से अधिक और बारह वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा किया गया अपराध पूर्णतः क्षमा योग्य नहीं होता है। यह अपराध बच्चे के समझ एवं न समझ पर निर्भर करता है। 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 21, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 83 की परिभाषा 

सात वर्ष से अधिक एवं बारह वर्ष से कम उम्र का बच्चा कोई ऐसा कार्य करता है, जो कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार अपराध है परंतु उसे बच्चों को इसकी जानकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में बच्चों को क्षमा कर दिया जाएगा, क्योंकि उसे अब तक किसी ने यह बताया ही नहीं है कि, वह जो कृत्य कर रहा है, गलत है अथवा अपराध है।

The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 section 21, Indian Penal Code, 1860 section 83 Punishment 

2023 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाया जिसमें एक 10 वर्षीय बच्चे पर चाकू से हमला करने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर, वह अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय करने में सक्षम नहीं था। इसलिए, बच्चे को दंडित नहीं किया गया बल्कि क्षमा कर दिया गया। 

2023 में, महाराष्ट्र उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाया जिसमें एक 12 वर्षीय बच्चे पर एक दुकान से सामान चोरी करने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर, वह अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय करने में सक्षम नहीं था। इसलिए, बच्चे को अपराधी घोषित नहीं किया गया बल्कि क्षमा कर दिया गया। 

2023 में, उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाया जिसमें एक 11 वर्षीय बच्चे पर एक अन्य बच्चे से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर, वह अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय करने में सक्षम नहीं था। इसलिए, बच्चे को दोषी नहीं ठहराया गया।

निष्कर्ष
आईपीसी की धारा 83 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को उनके अपराधों के लिए दंडित न किया जाए। यदि न्यायालय यह मानता है कि बच्चा अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय करने में सक्षम नहीं था, तो उसे दोषी नहीं ठहराया जाएगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 , इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
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