BNS 17, IPC 79 - आप अपराधी को पकड़ें, उसके घर वाले अपहरण कि FIR लिखवा दें, तो क्या करेंगे

Legal general knowledge and law study notes 

न्यायसंगत या न्यायानुमत कार्य वह कार्य होता है जो विधि के अनुसार सही हो अर्थात ऐसा कार्य जिससे किसी भी प्रकार से हो रहे अपराधों को रोकना या किसी भी प्रकार के अत्याचार को रोकना न्यायानुमत या न्यायसंगत कार्य होता है। आम नागरिक यदि किसी अपराधी को पकड़ ले तो उसके परिवार के लोग अपहरण अथवा बंधक बनाने का आरोप लगा सकते हैं। ऐसी स्थिति में हम आपको बता देंगे कानून की कौन सी धारा, आपका संरक्षण करेगी और आपके खिलाफ किसी भी शिकायत अथवा किसी भी पुलिस थाने में दर्ज की गई FIR को रद्द करवा देगी।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 17, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 79 की परिभाषा 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 17 अथवा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 79 कहती है कि कोई कार्य अपराध नहीं है, यदि वह किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है:
  • जो विधि द्वारा न्यायानुमत है।
  • जो तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके किया जाता है। 

विधि द्वारा न्यायानुमत कार्य क्या होते हैं

विधि द्वारा न्यायानुमत कार्य वह कार्य है जो किसी कानून द्वारा अनुमत है। उदाहरण के लिए, आत्मरक्षा में किसी व्यक्ति को मारना विधि द्वारा न्यायानुमत है।

तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके किया गया कार्य क्या होता है

तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके किया गया कार्य वह कार्य है जो कोई व्यक्ति उस विश्वास के आधार पर करता है कि वह कार्य विधि द्वारा न्यायानुमत है, जबकि वास्तव में वह कार्य विधि द्वारा न्यायानुमत नहीं है। 
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मारता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि वह व्यक्ति एक चोर है, जबकि वास्तव में वह व्यक्ति कोई चोर नहीं है। इस मामले में, व्यक्ति ने तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके कार्य किया है, इसलिए यह कार्य अपराध नहीं माना जाएगा।

आईपीसी की धारा 79 के कुछ उदाहरण

  • एक व्यक्ति अपने घर में घुसने वाले चोर को मारता है। यह कार्य आत्मरक्षा में किया गया है, इसलिए यह विधि द्वारा न्यायानुमत है।
  • एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को बचाने के लिए उसे चोट पहुंचाता है। यह कार्य विधि द्वारा न्यायानुमत है, क्योंकि यह एक सदाचारपूर्ण कार्य है।
  • एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मारता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि वह व्यक्ति एक चोर है। वास्तव में वह व्यक्ति कोई चोर नहीं है। यह कार्य तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके किया गया है, इसलिए यह कार्य अपराध नहीं माना जाएगा।

BNS 17, IPC 79 का महत्व

धारा 79 एक महत्वपूर्ण धारा है, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करती है। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि कोई व्यक्ति केवल तभी अपराधी माना जाएगा, जब वह जानबूझकर या गलत इरादे से कोई अपराध करे। 

The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 section 17, Indian Penal Code, 1860 section 79 Punishment 

राजा बनाम जूलियस (1849) मामले में, एक व्यक्ति ने अपने घर में घुसने वाले एक व्यक्ति को मार डाला। व्यक्ति का तर्क था कि उसने आत्मरक्षा में कार्य किया था। अदालत ने व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया, क्योंकि अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने वास्तव में आत्मरक्षा में कार्य किया था।

माजूमदार बनाम राज्य (1951) मामले में, एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को मार डाला। व्यक्ति का तर्क था कि उसने उस व्यक्ति को मार डाला था, क्योंकि उसे विश्वास था कि वह व्यक्ति एक चोर है। अदालत ने व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया, क्योंकि अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके कार्य किया था।

प्रेमनाथ बनाम राज्य (1966) मामले में, एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को मार डाला। व्यक्ति का तर्क था कि उसने उस व्यक्ति को मार डाला था, क्योंकि उसे विश्वास था कि वह व्यक्ति एक आतंकवादी है। अदालत ने व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाया, क्योंकि अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करके कार्य किया था। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 , इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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