भोपाल, 19 जून 2026: दिनांक 11 जून को दैनिक भास्कर के खंडवा संस्करण में खरगोन टुकड़ी के फ्रंट पेज पर एक प्राइवेट स्कूल का आधे पेज का विज्ञापन छापा जिसमें खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल का बयान भी प्रकाशित हुआ है। जिसमें वह स्कूल की प्रशंसा कर रही है। मतलब स्कूल का प्रचार कर रही हैं। दिनांक 16 जून को यह समाचार प्रकाशित किया गया (यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)। सोशल मीडिया पर कलेक्टर भव्या मित्तल के समर्थन में जबरदस्त प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आईए जानते हैं जनता क्या कह रही है और नियम क्या कहते हैं:-
सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है
श्री जितेंद्र सिंगार लिखते हैं कि, उन्होंने एक पैरेंट के नाते स्कूल की प्रशंसा की है। पब्लिक से अपील नहीं की है कि आप भी अपने बच्चों का एडमिशन इस स्कूल में करवाइए। श्री कृष्ण चंद्र उपाध्याय कहते हैं कि कलेक्टर ने अपने देश के स्कूल की तारीफ की है, दुश्मन देश के स्कूल की तारीफ तो नहीं की ना। श्री शिव प्रकाश मिश्रा लिखते हैं कि, She is highly decorative ias officer... इतना cheap काम वह नहीं कर सकती। कुछ लोगों ने इस तरह की प्रतिक्रियाएं देने वालों को, विषय समझने का प्रयास भी किया। बाकी सब तो समझ गए लेकिन श्री कृष्ण चंद्र उपाध्याय लगातार दावा कर रहे हैं कि कलेक्टर मैडम ने कुछ भी गलत नहीं किया।
नियम क्या कहते हैं
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, आम नागरिक नहीं होते। वह विशिष्ट नागरिक होते हैं, इसलिए जनता की टैक्स से उनको बड़ा बंगला, नौकर चाकर, सरकारी वाहन और आरामदायक जीवन के लिए हर सुविधा दी जाती है। कलेक्टर को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं इसलिए उनको आम नागरिकों की तरह स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। आईएएस अधिकारियों को All India Services (Conduct) Rules, 1968 के तहत काम करना होता है। Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 खासकर Rule 3 और Rule 15, किसी भी कलेक्टर एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को private trade/employment में भाग लेने से रोकता है। CCS Rules यह भी कहते हैं कि यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी को, व्यक्तिगत रूप से कोई प्रोडक्ट पसंद है, तो वह सार्वजनिक रूप से यह नहीं कह सकता कि मुझे यह प्रोडक्ट पसंद है, और मैं इसका नियमित उपयोग करता हूं।

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