जो माता सीता शिवधनुष उठा लेती थीं, रावण उनका हरण कैसे कर पाया- Bhopal Samachar GK

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Amazing facts in Hindi about Ramayan

हम सभी जानते हैं कि रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। हम सब यह भी जानते हैं कि स्वयंवर में रावण भगवान शिव का धनुष नहीं उठा पाया था और हम यह भी जानते हैं कि माता सीता भगवान शिव के धनुष को सहज ही उठा लिया करती थीं। प्रश्न यह है कि, माता सीता जब इतनी शक्तिशाली थीं और रावण कमजोर तो फिर रावण उनका हरण कैसे कर पाया। 

रावण को मृत्यु के बाद मोक्ष भी प्राप्त नहीं हुआ

साइंस की किताबों में इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलेगा परंतु भारतवर्ष के शास्त्रों में इस प्रश्न का उत्तर मिलता है। अपने उत्तर की खोज के लिए अपन श्री राम रावण के युद्ध समाप्त होने के बाद से प्रारंभ करते हैं। बहुत से लोग कहते हैं कि रावण प्रकांड विद्वान था, परम शिव भक्त था, लेकिन जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया तो शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण की आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ। वह बाल्यकाल से ही जिद्दी था। मृत्यु के पश्चात रावण की आत्मा ने भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या प्रारंभ कर दी, लेकिन भगवान शिव ने उसे मोक्ष नहीं दिया। 

भगवान शिव ने रावण को क्षमा क्यों नहीं किया

शास्त्रों में प्रसंग आता है कि, माता पार्वती ने जब भगवान शिव से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि रावण ने अपने जीवन में जितनी भी सफलता है प्राप्त की, अपनी जिद और साहस के कारण की। उसने प्रकृति के कल्याण के लिए शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया था। सफलता प्राप्त होने के बाद उसने पूरी राक्षस जाति को संरक्षण दिया और उसके संरक्षण के कारण राक्षसों ने पृथ्वी पर प्राणियों के जीवन का संतुलन ही बदल दिया था। तीसरी महत्वपूर्ण बात, यदि रावण अपने असली स्वरूप में माता सीता का हरण करता तो पश्चाताप के बाद उसका अपराध क्षमा किया जा सकता था परंतु उसने एक साधु का वेश धारण करके माता सीता का हरण किया। यह क्षमा योग्य नहीं है। इसलिए उसकी आत्मा को मोक्ष प्रदान नहीं किया जा सकता। 

कमजोर रावण, स्वयंभू शक्ति माता सीता का हरण कैसे कर पाया

भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद में अपने प्रश्न का उत्तर भी है। माता सीता का हरण रावण ने नहीं बल्कि एक साधु ने किया था। मर्यादा के कारण माता सीता ने आत्मरक्षा में साधु पर आक्रमण नहीं किया और इस प्रकार रावण माता सीता का हरण कर पाया। 

निष्कर्ष स्वरूप हम यह भी कह सकते हैं कि, पृथ्वी पर प्राणियों के जीवन को संतुलित करने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु ने श्री राम के रूप में अवतार लिया था। उनके जीवन का लक्ष्य रावण एवं राक्षस कुल का विनाश करना ही था। यदि माता सीता, हरण के समय अपनी शक्ति का उपयोग करतीं तो प्रभु श्री राम का संकल्प कैसे पूरा होता है। 

सीता हरण से पहले भगवान राम ने राक्षसों के विनाश का संकल्प ले लिया था

यह बहुत कम लोग जानते हैं कि सीता हरण के प्रसंग से पहले ही भगवान श्रीराम ने राक्षसों के विनाश का संकल्प ले लिया था। वर्तमान में मध्यप्रदेश के सतना जिले में सिद्धा पहाड़ नाम का एक पर्वत है। यह पहाड़ उन साधुओं की स्त्रियों से बना है, जिनकी हत्या राक्षसों ने की थी। वनवास के समय जब श्रीराम को इसका पता चला तो, इसी सिद्धा पहाड़ पर खड़े होकर श्री राम ने पृथ्वी से राक्षसों का विनाश करने का संकल्प ले लिया था। यह पहाड़ आज भी अपने अस्तित्व में है। 

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