Legal advice- कोर्ट किस कानून के तहत साक्षियों की पुनः परीक्षा करवा सकता है, पढ़िए CrPC-311

जब कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन होता है तब सत्र न्यायालय के समक्ष कोई विचारण दण्ड प्रक्रिया संहिता के अध्यक्ष 18 के अनुसार धारा 225 से 237 के अंतर्गत होता है एवं वारण्ट मामलों में अन्य मजिस्ट्रेट के समक्ष संहिता के अध्याय 19 धारा 238 से 250 के अंतर्गत किया जाता है एवं समन मामलों का विचारण अध्याय 20 की धारा 251 से 259 तक किया जाता है सभी मामलों का विचारण न्यायालय द्वारा किया जाता है। न्यायालय विचारण के दौरान साक्षियों की परीक्षा करता है एवं स्वंय भी अपने स्तर पर जाँच करवाता है सवाल यह है कि न्यायालय को साक्षियों की पुनः परीक्षा, प्रतिपरीक्षा करनवाने का अधिकार शक्ति प्राप्त है जानते हैं।

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 311 की परिभाषा

कोई भी न्यायालय दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 के अधीन जाँच,विचारण के समय किसी भी व्यक्ति को समन जारी कर साक्षी के रूप में बुला सकता है एवं परीक्षा करवा सकता है अगर किसी गवाह ने एक बार गवाही दे दी है और न्यायालय को लगता है की उस व्यक्ति की पुनः गवाही लेना है तो न्यायालय को उक्त धारा के अंतर्गत शक्ति प्राप्त है की वह साक्षी की पुनः परीक्षा ले सकता है।

यदि न्यायालय को जाँच के बाद पता चलता है की किसी अन्य व्यक्ति की साक्षी के रूप में परीक्षा करवानी है तो समन जारी कर उसकी परीक्षा करवाएगा या उसे पुनः परीक्षा, प्रतिपरीक्षा के लिए बुलवाएगा।

सामान्य अर्थ में कहे तो यह धारा न्यायालय को शक्ति देती है कि वह साक्षी की परीक्षा जब अवश्यक हो करवा सकता है यह न्यायालय का विवेकाधिकार है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665

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