ग्वालियर में कॉलेज संचालक के बेटे की हत्या, नगर निगम कर्मचारी घर से ले गया था- NEWS TODAY

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ग्वालियर।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक कॉलेज संचालक का बेटा लापता हो गया। पुलिस ने इस मामले में नगर निगम कर्मचारी को पकड़ा है। उसने पुलिस को बताया कि पैसों के विवाद में युवक की हत्या कर शव नदी में फेंक दिया है, लेकिन शव कहां फेंका, यह नहीं बता पा रहा है। इसके बाद पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस का कहना है कि जब तक शव नहीं मिल जाता, कुछ नहीं कह सकते।

अभय सिंह परमार को करण वर्मा घर से बुलाकर ले गया था: पुलिस

ग्वालियर के सिटी सेंटर सत्यम रेजीडेंसी में रहने वाले प्रशांत सिंह परमार स्कूल-कॉलेज संचालक हैं। उनके ब्राइड नाम से शिक्षा संस्थान हैं। उनका बेटा अभय सिंह परमार (23) उर्फ प्रखर भी पिता के कामकाज में उनकी मदद करता है। प्रशांत सिंह ने बताया कि मंगलवार दोपहर करन वर्मा, बेटे को बुलाकर ले गया था। दोनों कार से निकले थे। करन वर्मा नगर निगम में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। रात तक नहीं लौटा, तो फोन किया। दोनों के मोबाइल भी स्विच ऑफ मिले। देर रात उसकी कार नगर निगम ऑफिस के पास खड़ी मिली। इसके बाद परिवार वाले रात करीब 12 बजे विश्वविद्यालय थाना पहुंचे। उन्होंने करन वर्मा पर संदेह जताया। पुलिस ने रात में ही करन को हिरासत में ले लिया।

पुलिस को डेड बॉडी नहीं मिली

पूछताछ में करन वर्मा ने पुलिस को बताया कि उसने पप्पू की हत्या कर दी है। शव को ग्वालियर के आसपास किसी जगह फेंकने की बात कही है। यह सुनते ही पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई। जब पुलिस ने पूछा- शव कौन सी नदी में फेंका ? तो कहता है कि याद नहीं आ रहा। उसने कुछ साथियों के भी नाम बताए हैं। हालांकि फिलहाल पुलिस को शव नहीं मिला है।

करन ने पुलिस को बताया है कि वह दोपहर में प्रखर को बुलाकर ले गया था। वहां से दो साथियों के साथ कार से निकला। कलेक्ट्रेट के पीछे न्यू पंचायत भवन के पास पीछे से कार में ही सीट पर बैठे अभय का गला रस्सी से कस दिया। इसी समय, ड्राइविंग सीट पर बैठे मोनू नाम के साथी ने उसे गोली मार दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाया है। प्रशांत का कहना है कि रात को ही कार में ब्लड देखकर अनहोनी की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई।

अभय रोजाना उससे रुपए मांगने जाता था

प्रशांत परमार ने बताया कि करन वर्मा हमारे कॉलेज का छात्र रहा है। करीब एक साल पहले नगर निगम में उससे मुलाकात हुई थी। वहां उसकी नौकरी लग गई थी। प्रशांत ने बताया कि उसने करन वर्मा से कहा था कि डीडी नगर में कॉलेज भवन के निर्माण की अनुमति दिला देना। इस पर उसने 7.8 लाख रुपए में अनुमति दिलाने की बात कही थी। मैंने बेटे प्रखर को पैसे लेकर भेजा था। कहा था- पैसे जमा कर रसीद लेकर आना। उसने करन को पैसे दे दिए थे, लेकिन उसने रसीद नहीं दी। रसीद के लिए करन टालता रहा। उसने डेढ़ लाख रुपए और उधार लिए थे। मेरे कहने पर अभय रोजाना उससे रुपए मांगने जाता था। सोमवार को उसकी करन से बहस हुई थी।

जिस नगर निगम कर्मचारी को पुलिस ने उठाया है, वह पहले भी अपर आयुक्त का ऑडियो वायरल करने पर चर्चा में आ चुका है। उस समय उसे सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में वह बहाल हो गया था। मामले में एएसपी क्राइम राजेश दंडौतिया का कहना है कि अभी स्थिति अस्पष्ट है। संदेही नगर निगम का कर्मचारी हत्या करने की बात कह रहा है, लेकिन शव कहां फेंका, नहीं बता पा रहा। जांच की जा रही है।
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