अधिकारी के बुलावे पर हाजिर ना होने वाले लोगों को क्या सजा दी जाती है, पढ़िए IPC 172

समाज में अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा कई अधिकारियों को प्राधिकार दिए जाते हैं। प्राधिकृत अधिकारी सरकार द्वारा बनाए गए नियमों, आदेशों, विनियमों को लागू करवाते हैं। कई बार कुछ लोग आदेशों का उल्लंघन करते हैं अथवा किसी विषय विशेष में आम नागरिकों के बयान की आवश्यकता होती है। तब अधिकारी उन्हें उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी करते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसे नोटिस का पालन नहीं करता, हाजिर नहीं होता तो उसे 21 नियम और कानून के तहत कितनी सजा दी जा सकती है, यहां पढ़िए:- 

कोई आम नागरिक, अधिकारियों के वैध कार्यों की अवज्ञा करता है या अवमानना करता है या अवहेलना करता है तब ऐसे व्यक्ति को भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय 10 की धारा 172 से लेकर 190 तक लोकसेवक के विधिपूर्ण अधिकार को अवमानना करने के लिए दण्डित किया जा सकता है। आज हम बात करते हैं अधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को बुलावा के लिए या न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए भेजे गए समन, आदेश, नोटिस की अवमानना या अवहेलना करना मात्र करना कब अपराध होगा जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 172 की परिभाषा:- 

कोई भी व्यक्ति न्यायालय, राजस्व अधिकारी, पुलिस अधिकारी या अन्य लोकसेवक के विधि पूर्ण अधिकार से भेजा गया लिखित बुलावा (समन), नोटिस, आदेश की अवमानना करेगा या उनका पालन नहीं करेगा जैसा लोकसेवक ने बताया है एवं आदेश, समन, नोटिस जारी होने के बाद कहीं छिप जाता है या भाग जाता है तब ऐसा व्यक्ति उपर्युक्त धारा के अंतर्गत दोषी होगा।

• न्यायालय द्वारा साक्षियों को गवाही के लिए एवं साक्ष्यों को सबूत के साथ पेश करने के लिए लिखित समन जारी करता है अगर व्यक्ति न्यायालय या मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर नहीं होता है तब अवमानना या पालन नहीं करने वाला व्यक्ति उपर्युक्त धारा 172 के अपराध से दण्डनीय होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 172 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं है, यह असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होंगे। इनकी सुनवाई कोई भी न्यायिक मजिस्ट्रेट कर सकता है। 

सजा- इस अपराध की सजा को दो वर्गों में बाँटा गया है:-

1. किसी भी प्रकार के अधिकारी के लिखित बुलावा, आदेश, नोटिस का पालन नहीं करने के लिए अधिकतम एक मास के कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

2. अगर न्यायालय द्वारा व्यक्तिगत उपस्थित होने के लिए कोई समन, सूचना भेजी गई है उसका पालन न करने पर अधिकतम छः माह कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665

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