BHOPAL NEWS- शेरखान की जमीन पर सरकारी यूनिवर्सिटी बना दी, दो बार अतिक्रमण हटाने कह चुका है

भोपाल
। यदि कोई सरकारी जमीन पर कब्जा कर ले तो सरकार क्या करती है, JCB और पुलिस भेज कर अतिक्रमण को नष्ट कर दिया जाता है लेकिन यहां तो सरकार ने शेरखान (बाघ) के इलाके पर कब्जा कर लिया। भोज मुक्त विश्वविद्यालय का भवन और परिसर बना दिया। 

अतिक्रमण हटाने दो बार कह चुका है शेरखान (बाघ) 

बाघ एक हिंसक जानवर है और यदि उसकी टेरिटरी पर कोई कब्जा करता है तो वह जानलेवा हमला कर देता है परंतु आश्चर्यजनक बात यह है कि यह बाघ, शांतिप्रिय और कानून का पालन कर रहा है। यूनिवर्सिटी के कुलपति को दो बार कह चुका है। कुछ दिनों पहले 7 फरवरी 2022 दूसरी बार कुलपति के बंगले में आया था। रात भर रुका रहा लेकिन कुलपति उससे बात करने बाहर ही नहीं निकले। प्रश्न यह है कि शेरखान को न्याय कौन दिलाएगा। क्या उसे जंगल के कानून के तहत कार्रवाई करनी पड़ेगी।

साबित हो गया कि शेरखान के इलाके में यूनिवर्सिटी बनी है

विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ के पूर्वजों की यहां टेरेटरी रही है, उनकी कई पीढ़ी इसी क्षेत्र में मूवमेंट करती हैं। भोज विवि परिसर में जो बाघ घूम रहा है, वह बाघिन 123 का शावक है और मां से अलग होकर अपनी टेरेटरी बना रहा है। यहां पर उसके नाना यानी बाघ टी-1 और बाघिन टी-2 का भी मूवमेंट रहा है। भोपाल वन मंडल के समरधा रेंज के पूर्व रेंजर सुधीर सिंह ने बताया कि पहले बाघ-टी-1 व टी-2 की टेरेटरी आईआईएफएम, ज्यूडिशियल अकादमी, खुशीलाल अस्पताल, पुलिस लाइन के पीछे वाला हिस्सा रही है।

पीढ़ियों से यहीं रहते आए हैं इस परिवार के बाघों

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. सुदेश बाघमारे का कहना है कि क्षेत्राधिकार की लड़ाई बेहतर भोजन व क्षेत्र को लेकर होती है। भोपाल और उसके आसपास के जंगलों में बाघों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है। भोपाल में घूम रहे बाघ रेसीडेंशियल है, यानी यहीं उनका जन्म हुआ। एक ही मां की संतान हैं, इसलिए उक्त क्षेत्र में इनका मूवमेंट बना है। 

यह है शेर खान की फैमिली की हिस्ट्री

2009 में पहले बाघ टी-1 व बाघिन टी-2 रातापानी सेंक्चुरी से आकर बसे थे। बाघिन टी-2 ने दो शावक को जन्म दिया। इसमें से नर शावक की मौत हो गई। एक मादा शावक का नाम टी-21 रखा। दूसरी बार बाघिन टी-2 ने 3 शावकों को जन्म दिया। बाघिन टी- 21 ने दूसरी बार 3 शावकों को जन्म दिया। बाघिन टी-2 की बेटी टी- 213 ने 4 शावकों को जन्म दिया। भोपाल के नजदीक 3 नए बाघ होने के साक्ष्य मिले हैं। इनमें बाघ टी-3, टी-4 व एक अन्य शामिल हैं। बाघिन टी-123 ने दो साल पहले दो शावकों को जन्म दिया था।

कभी बाघों की टेरेटरी रोशनपुरा तक रही है

पूर्व चीफ कंजरवेटर रहे जगदीश चंद्रा ने बताया ने कि बाघों में जन्मजात स्वभाव होता है कि वे अपने पूर्वजों की टेरेटरी को एक्सप्लोर करते हुए कई बार रहवासी इलाके में पहुंच जाते हैं। इनके मुताबिक एक जमाने में मुख्यमंत्री आवास और पॉलिटेक्निक चौराहा, रोशनपुरा तक बाघ का मूवमेंट था। भोपाल की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया bhopal news पर क्लिक करें।