समुद्र से 125 मीटर नीचे एक देश, जहां नालों में ज्वालामुखी का लावा बहता है- GK in Hindi

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अपन सभी ने कहानियों में सुना है कि धरती के नीचे पाताल में भी लोग रहते हैं। कुछ देशों में ऐसे स्थान भी हैं जहां जमीन के नीचे काफी गहराई में लोग रहते हैं परंतु क्या आप जानते हैं दुनिया में एक पूरा देश ऐसा है जो समुद्र तल से 125 मीटर नीचे बसा हुआ है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस देश के नालों में ज्वालामुखी का लावा बहता रहता है। इसे दुनिया का सबसे गर्म देश कहा जाता है। क्योंकि यहां पानी जमीन पर गिरते ही भाप बनकर उड़ जाता है। बावजूद इसके यहां हमारे जैसे लोग रहते हैं और दुनिया के कई लोग इस देश में घूमने के लिए भी जाते हैं।

Danakil Depression- दनाकिल डिप्रेसन, डैनाकिल डिप्रेसन, डानाकिल डिप्रेशन, डॅनाकिल डिप्रेशन 

अफ्रीका के उत्तर में स्थित इस देश का नाम इथियोपिया है। अंग्रेजी में इस स्थान को Danakil Depression कहा गया है। हिंदी में लोग अपने अपने तरीके से उच्चारण करते हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक और लोग यहां यह देखने के लिए जाते हैं कि मौसम कितना खराब हो सकता है। यह समुद्र तल से 125 मीटर नीचे है। कई घंटों में ज्वालामुखी का लावा खौलता हुआ मिलता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कहानियों में नरक के बारे में बताया गया है। यहां इथियोपिया के अफ़ार समुदाय के लोग रहते हैं।

पृथ्वी की वह जगह जहां पर तीन टेक्टॉनिक प्लेट्स मिलती हैं

यह पृथ्वी की वह जगह है जहां पर तीन टेक्टॉनिक प्लेट्स (अफ़्रीकी प्लेट, अरब प्लेट और भारतीय प्लेट ) मिलती हैं। यही तीनों प्लेट्स पर हमारे सभी महाद्वीप और महासागर स्थित है। यह पूरा इलाका एक ज्वालामुखी के जैसा दिखता है। जैसे अपनी जमीन पर पानी से भरे हुए नदी, नाले और तालाब होते हैं। वैसे ही यहां पर ज्वालामुखी के लावा से भरे हुए कई तालाब और नाले चारों तरफ दिखाई देते हैं। बारिश यहां भी होती है लेकिन नाम मात्र की। पानी जमीन पर गिरते ही भाप बनकर उड़ जाता है।

समुद्र के नीचे एक नया लाल समुद्र बन रहा है

यहां पहुंचकर कोई नहीं कह सकता कि आप धरती पर हैं। यह कोई दूसरा ग्रह लगता है। आस-पास के इलाक़ों में लावे के ठंडे होने से बनी चट्टानें और पहाड़ियां दिखाई देती हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि डानाकिल डिप्रेशन के नीचे धरती खिसक रही है, उससे लाखों साल बाद यहां गहरा गड्ढा हो जाएगा। इस जगह से एक नए समुद्र की शुरुआत होगी।

पृथ्वी पर इंसान के विकास का पहला ठिकाना

1974 में वैज्ञानिक डोनाल्ड जॉनसन और उनकी टीम को यहां एक बेहद पुराना कंकाल मिला था। इस कंकाल का नाम लूसी रखा गया। यह कंकाल, मानव के विकास के प्रारंभिक चरण का बताया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कंकाल एक महिला का था। वो ऑस्ट्रेलोपिथेकस नस्ल की थी। यह नस्ल धरती पर इंसान के जैसे दिखाई देने वाले सबसे पुराने प्राणियों की मानी जाती है। यहां पर इस प्रकार के कई कंकाल मिले हैं, जो मानव के विकास की प्रक्रिया के पहले के हैं और बिल्कुल मानव जैसे हैं। इसीलिए वैज्ञानिक इसे इंसान के विकास का पहला ठिकाना मानते हैं।

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