MPPEB NEWS- ढाई लाख युवाओं को कभी नौकरी नहीं मिलेगी, गलती पीईबी की, सजा बेरोजगार भुगतेंगे

भोपाल
। Professional Examination Board, Bhopal द्वारा इस साल किसी भी भर्ती परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के कारण मध्य प्रदेश के ढाई लाख शिक्षित एवं योग्य युवाओं को कभी नौकरी नहीं मिल पाई। इस बार का अड़ंगा कोरोनावायरस के कारण नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के कारण लगा। व्यापम घोटाला-2 वाली परीक्षा एजेंसी की जांच चल रही है। इसलिए दागी एजेंसी से परीक्षा नहीं करा सकते और दूसरा कोई विकल्प सरकार के पास है ही नहीं।

व्यापम घोटाला-2 कि जांच पूरी होने तक कोई परीक्षा नहीं होगी

आपको याद होगा कि अभी कुछ समय पहले ही व्यापम घोटाला-2 शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा स्वीकार किया गया है। (उम्मीदवार तो शुरुआत से ही भोपाल समाचार डॉट कॉम के माध्यम से सबूत और दलीलें पेश कर रहे थे।) सरकार ने प्रारंभिक तौर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सहित तीन परीक्षाएं निरस्त कर दी थीं। इनमें मिली गड़बड़ी की जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक कोई परीक्षा नहीं होगी।

ढाई लाख शिक्षित बेरोजगार युवा ओवरएज आएंगे 

पीईबी के अध्यक्ष आईसीपी केशरी का कहना है कि पीईबी की परीक्षाएं दिसंबर तक नहीं होंगी। अब तक किसी परीक्षा की तारीख घोषित नहीं है। केवल संभावित महीने दिए गए थे। हाल ही में निरस्त की गई तीन परीक्षाओं की भी अब तक तारीख घोषित नहीं हो सकी है। शिवराज सिंह चौहान सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख शिक्षित बेरोजगार युवा ओवरएज हो जाएंगे। 

मध्यप्रदेश में प्रतिभा की कमी नहीं लेकिन मुख्यमंत्री सिर्फ बधाई देते हैं

मध्यप्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कल ही जीमैट की परीक्षा में शिवांगी गवांदे ने इंडिया में टॉप और वर्ल्ड में सेकंड रैंक हासिल की है। सीए फाइनल ईयर की परीक्षा में शिवांगी और नंदिनी इंडिया लेवल पर फर्स्ट और सेकंड रैंक हासिल की है परंतु मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार अपने प्रतिभाशाली युवाओं को सिर्फ बधाई देती है। उन्हें योग्य नौकरी देकर प्रदेश की तरक्की में उनका योगदान सुनिश्चित नहीं करती। 

MPPEB है या कोई खटारा बस, विकल्प होना चाहिए 

एक बात समझ में नहीं आती। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड भोपाल के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए किसी परीक्षा का आयोजन क्यों नहीं किया जाता, क्योंकि यदि कोई परीक्षा का आयोजन किया जाता तो निश्चित रूप से किसी भी एजेंसी को परीक्षा के लिए अनुबंधित करने से पहले चेयरमैन विकल्प की भी व्यवस्था करके रखता। आम आदमी छोटी सी कार खरीदते समय भी स्टेपनी का ख्याल रखता है, और एमपीपीईबी के चेयरमैन ने ऑनलाइन परीक्षा के आयोजन में किसी अल्टरनेटिव सिस्टम की व्यवस्था नहीं की। कितनी अजीब बात है, योग्यता का निर्धारण करने वाली एजेंसी के महत्वपूर्ण पदों पर....।

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