धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। यह काल साधना, उपासना और गुप्त विद्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें नौ देवियों की नहीं, बल्कि तंत्र साधना और विशेष मनोकामनाओं के लिए 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा, यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। इस बार गुप्त नवरात्र 9 दिन तक रहेगी। खास बात यह है कि इसका शुभारंभ 12 साल बाद गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग के दुर्लभ संयोग में हो रहा है।
15 जुलाई को बुधवार, पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति रहेगी। चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा। सामान्यतः गुरु का एक ही राशि में आगमन 12 वर्ष में होता है, इसलिए यह संयोग बेहद विशेष माना जा रहा है।
गुप्त नवरात्र काल में 2 सर्वार्थ सिद्धि योग और 3 रवि योग भी बनेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में नई शुरुआत, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, ऑफिस शिफ्टिंग और व्यवसाय से जुड़े कार्य करना शुभ माना जाता है।
राशि के अनुसार विशेष मंत्र
अपनी राशि के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करने से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं:
- मेष: ॐ ऐं क्लीं सौं:
- वृषभ: ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
- मिथुन:ॐ क्लीं ऐं सौं:
- कर्क: ॐ ऐं क्लीं श्रीं
- सिंह: ॐ ह्रीं श्रीं सौं:
- कन्या: ॐ श्रीं ऐं चामुण्डायै नमः
- तुला: ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
- वृश्चिक: ॐ ऐं क्लीं सौं:
- धनु: ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
- मकर: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
- कुंभ: ॐ शं ह्रीं सौं:
- मीन: ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
गुप्त नवरात्रि की विशेष बातें
यदि आप इन नौ दिनों में अपनी कोई विशेष मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो इन 3 गुप्त बातों का ध्यान जरूर रखें:
१. पूर्ण गोपनीयता: आप कौन सा मंत्र पढ़ रहे हैं, क्या उपाय कर रहे हैं या व्रत रख रहे हैं—यह बात आपके अलावा किसी दूसरे को पता नहीं होनी चाहिए। यहां तक कि परिवार के सदस्यों से भी अपनी साधना गुप्त रखें।
२. सात्विकता और ब्रह्मचर्य: इन नौ दिनों में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूर रहें। वाणी में मधुरता रखें और किसी की बुराई न करें।
३. रात्रि पूजा का फल: इस नवरात्रि में रात 9 से 11 बजे या आधी रात (निशिता काल) में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यदि कोई बड़ी परेशानी हो, तो नौ दिनों तक लगातार 'दुर्गा चालीसा' का गुप्त रूप से पाठ करें।
