भोपाल, 5 जुलाई 2026: स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह अनजाने में या किसी रणनीति के तहत मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को बड़ा झटका देने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान होने और 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश जारी हो जाने के बावजूद शिक्षकों की विशेष पात्रता परीक्षा को टालने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रयास सरकार को आज तो राहत देगा लेकिन 2028 में विधानसभा चुनाव के समय बड़ी समस्या के रूप में सामने आ जाएगा जिसे सॉल्व नहीं किया जा सकेगा।
शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में स्कूल शिक्षा विभाग का नया तर्क
लेटेस्ट न्यूज़ मिली है कि स्कूल शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा के मामले में शिक्षकों को राहत देने के लिए एक और याचिका दाखिल की जा रही है। इस याचिका में तर्क यह दिया जाएगा कि, मध्य प्रदेश में 2005 के बाद शिक्षकों एवं अध्यापकों की नियुक्ति व्यावसायिक परीक्षा मंडल अथवा विभागीय परीक्षा के माध्यम से हुई है। मतलब उन्होंने परीक्षा पास कर ली है इसलिए उनसे दोबारा परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए। सुनने में यह लॉजिक बड़ा पॉजिटिव साउंड करता है। बात सही है, जब भर्ती परीक्षा के बाद नियुक्ति हुई है तो फिर दोबारा परीक्षा क्यों दें, लेकिन यदि आप ध्यान से देखेंगे तो, यह तर्क एक बकवास से ज्यादा कुछ भी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हो सकता है
दरअसल 2009 में लागू हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम में प्रावधान है कि जो शिक्षक इस अधिनियम के लागू होने से पहले नियुक्त हो चुके हैं और सेवाएं दे रहे हैं वह सभी एक निर्धारित अवधि के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा को पास करेंगे। सोशल मीडिया पर नॉरेटिव फैलाया जा रहा है कि यह सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण हो रहा है जबकि एक्चुअल में सुप्रीम कोर्ट केवल शिक्षा के अधिकार का अधिनियम लागू कर रहा है। जो प्रावधान अधिनियम में है, उसको सुप्रीम कोर्ट द्वारा बदला नहीं जा सकता है। किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है। RTE ACT में पात्रता परीक्षा का स्पष्ट प्रावधान है। भर्ती परीक्षा को कोई राहत नहीं दी गई है। जब अधिनियम में भर्ती परीक्षा को कोई राहत दी ही नहीं गई है, तो सुप्रीम कोर्ट कैसे दे सकता है।
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को क्या समस्या होगी
जुलाई 2026 में स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से नई याचिका दाखिल करने की बात की जा रही है। अक्टूबर के आसपास याचिका लगेगी। 4-6 महीने याचिका की सुनवाई में चले जाएंगे। 2027 के आखिरी तक याचिका का फैसला हो जाएगा और इसके निरस्त हो जाने की पूरी संभावना है। फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 अगस्त 2018 से पहले शिक्षकों की पात्रता परीक्षा का आयोजन करना पड़ेगा। इसके कारण शिक्षकों की तरफ से भारी विरोध किया जाएगा। इसी समय में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही होगी। यदि परीक्षा के बाद रिजल्ट आ गया और केवल 10% शिक्षक फेल हो गए, तो भी बवाल मच जाएगा। मतलब ठीक चुनाव के समय स्कूल शिक्षा विभाग, जिसकी कर्मचारी चुनाव करवाते हैं, पीठासीन अधिकारी होते हैं, मध्य प्रदेश में राजनीति करते हैं और वोटो को प्रभावित करते हैं। वहां सरकार के खिलाफ विरोध चल रहा होगा।

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