MPPSC NEWS- 33 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति निरस्त

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धीरज जॉनसन।
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने 2 अगस्त को आदेश जारी कर कुछ विषयों के अभ्यर्थियों को जो सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2017 में चयनित हुए थे, उनका चयन निरस्त कर दिया है। 

आदेश के अनुसार मप्र लोक सेवा आयोग ने चयन सूची जो 2019 में जारी की थी और सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति/पदस्थापना प्रदान की थी। म.प्र.उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक एम सी सी 1349/2020 में पारित निर्णय दिनांक 01/02/2021 एवं याचिका क्रमांक डब्ल्यू पी 19393/2019 में पारित निर्णय दिनांक 24/4/2020 के अनुपालन में म.प्र.लोक सेवा आयोग द्वारा पुनरीक्षित सूची जारी की गई थी। लोक सेवा आयोग द्वारा जारी पुनरीक्षित चयन सूची अनुसार कुछ अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किया गया है। 

इस आदेश के आते ही सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2017 का मुद्दा फिर सामने आ गया है। एक जानकारी के अनुसार मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा 2014 एवं 2016 में उच्च शिक्षा विभाग के लिए सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का विज्ञापन जारी हुआ था पर कुछ कारणों से वह निरस्त हो गया था जो 2017 में पुनः प्रकाशित किया गया वह विसंगतियों के कारण प्रारम्भ से ही विवादों के घेरे में रहा औऱ अब फिर चर्चाओं का विषय बन गया है। 

विदित हो कि शुरुआत में ही उक्त परिक्षा के आवेदन करने की अंतिम तिथि के बाद भी दस्तावेज दुरस्त करने के लिए लिंक ओपन की गई थी और करीब 30 से ज्यादा संशोधन आयोग और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विज्ञापन से नियुक्ति तक के दौरान किये गए एवं दस्तावेजों का सत्यापन, रिजल्ट घोषित होने के बाद व सत्यापित तिथि निकल जाने के उपरांत भी लगभग 605 अभ्यर्थियों को साल भर का मौका दिया गया था कि वे सर्टिफिकेट की कमी को पूरा कर लें एवं 89 अन्य अभ्यर्थियों की योग्यता और सर्टिफिकेट पर भी संदेह था जिनमें वाणिज्य विषय काफी चर्चा में रहा क्योकि यहां वे उम्मीदवार भी चयनित हो गए जिनके पास कॉमर्स से एम.कॉम. की उपाधि हासिल नहीं थी। 

इस परीक्षा की खास बात यह थी कि मध्यप्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में वर्षो से व्याख्यान दे रहे अतिथि विद्वानों को भी बोनस अंक प्रदान किये गए जिन अंकों के सहारे काफी उम्मीदवार चयनित हुए। पर आयोग और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह जांच नहीं कि गई, कि जो लोग अतिथि विद्वान व्यवस्था की वरीयता सूची में शामिल होकर वर्षो से कॉलेज में व्याख्यान दे रहे थे क्या उनके स्नातकोत्तर डिग्री के प्रतिशत सही थे? 

जिनका सहारा लेकर अब वे सहायक प्राध्यापक है क्योंकि अधिकतर अभ्यर्थियों ने अतिथि विद्वान व्यवस्था के तहत वरीयता सूची में स्थान प्राप्त करने के लिए स्नातकोत्तर डिग्री के प्रतिशत (सी जी पी ए ग्रेड पॉइंट) उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल पर गलत औऱ बढ़ा कर दर्ज किए और इस परीक्षा के लिए बोनस अंक की जुगाड़ कर ली और सहायक प्राध्यापक परीक्षा के आवेदन में  प्रतिशत को कम करके दर्ज कर दिए पर इसकी भी जांच नहीं हुई। 

इसके साथ ही रोस्टर,आरक्षण व अन्य विसंगतियों के कारण प्रकरण न्यायालय तक भी गए। यह भर्ती इसलिये भी चर्चा में रही क्योकि इसमें साक्षात्कार  समाप्त हुआ व सम्पूर्ण देश के अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा भी 44 वर्ष की गई थी। आय एवं क्रीमीलेयर औऱ नॉन क्रीमीलेयर के दस्तावेजों की जांच पर भी संशय रहा,इसके साथ ही विज्ञापन के पदों की संख्या में भी बार-बार सुधार हुआ।

इस भर्ती का सबसे ज्यादा प्रभाव उन योग्य व अनुभवी अतिथि विद्वानों पर हुआ जो पिछले 20-25 सालों से प्रदेश के विभिन्न सरकारी कॉलेज में न्यूनतम मानदेय पर व्याख्यान के लिए आमंत्रित थे जिन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई और कुछ असमय काल के गाल में समा गए। अतिथि विद्वान व्यवस्था से बाहर होने के बाद धरना,आंदोलन पत्राचार,कोर्ट केस भी लगते रहे और प्रदेश के मुख्य दलों के समक्ष भी यह मुद्दा छाया रहा, इसके बाद बमुश्किल पुनः अतिथि विद्वानों को व्यवस्था में लिया गया पर अब भी काफी लोग बाहर ही है जो लगातार उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल को देखते रहते है कि कब चॉइस फिलिंग आये और वे व्यवस्था में फिर से आ सकें।

आश्चर्यजनक पहलू यह है कि उक्त परीक्षा से संवंधित विसंगति के प्रकाश में आने के बावजूद नव चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान कर दी गई औऱ अब नियमों के हवाले से सूची में फेरबदल किया गया।

जिनका चयन अब तक निरस्त किया गया

भौतिकशास्त्र :- 08
रसायनशास्त्र :- 08
अंग्रेजी :- 07
वनस्पतिशास्त्र :- 02
गणित :- 01
अर्थशास्त्र :- 01
प्राणीशास्त्र :- 03
वाणिज्य :-02
इतिहास :-01

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