मध्यप्रदेश में निशक्त बच्चों की निरक्षरता दर 75%, कोई पढ़ाने वाला ही नहीं - Khula Khat

श्रीमान स्कूल शिक्षा मंत्री
, मध्य प्रदेश। मान्यवर,मध्यप्रदेश में दिव्यांग छात्र छात्राओं का भविष्य अधर झूल में हैं। इनका कोई धनीधोरी नहीं है इनकी किसी को भी चिंता नहीं है। मध्यप्रदेश में निशक्त बच्चों की निरक्षरता दर 75% पहुंच चुकी है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में संचालित सामान्य विद्यालयों में कोई भी व्यवसायिक एवं कार्मिक भारतीय पुनर्वास परिषद नई दिल्ली द्वारा अधिसूचित एवं पंजीकृत विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इससे आप दिव्यांगो की शिक्षा के बारे में तथा RCI ACT 1992- 93 एवम RTE ACT 2009 के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्य शासन इस क्षेत्र में क्या कैसा कार्य कर रहा है ? 

मध्य प्रदेश शासन के विभिन्न विकलांगों के लिए कार्यरत विभागों तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय , महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और चिकित्सा विभाग आदि द्वारा ऊंट के मुंह में जीरा मानवीय संसाधन मध्य प्रदेश में उपलब्ध हैं परंतु मध्यप्रदेश में निशक्त दिव्यांगों की शिक्षा सोचनीय एवं चिंतनीय स्थिति में है क्योंकि यहां पर उच्च पदों पर आसीन महानुभाव द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है विकलांग शिक्षा हेतु समावेशित शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु RMSA (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) का बजट किस अनुपात में और कैसे खर्च हो रहा है की स्कूल शिक्षा विभाग में कोई भी विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं है अतः दिव्यांगों की शिक्षा पर है हाशिए पर है।

सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में दिव्यांग छात्रों का शिक्षा का अधिकार छीनता हुआ नजर आ रहा है। क्योंकि मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में आज तक कोई भी मानवीय संसाधन विशेष शिक्षक के रूप में उपलब्ध नहीं करवाया गया है। शासन स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाएं एवं संस्थाओं को उनके एवं उनके संचालकों को यह देखना चाहिए कि दिव्यांग छात्र छात्राओं का स्तर सुधारने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा कितने विशेष शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं तथा अब तक 1992 से कितने विशेष शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और क्या वे नियमित हैं नहीं है तो क्यों नहीं है और बड़ी बात यह है मध्यप्रदेश शासन अब तक इस संबंध में चुप क्यों है। 

निशक्त जन आयुक्त भोपाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग भोपाल, केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन , राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के मंत्रालय इस बारे में सवाल क्यों नहीं करते और साथ ही न्याय संगत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय शासन से क्यों नहीं पूछता की दिव्यांगों के लिए विशेष शिक्षक की उपलब्धता क्यों नहीं है तथा पदासीन वर्ग और संस्थाएं अपने मतलब के हैं वें वेतन पाना चाहते हैं अथवा शासन के दबाव में हैं अतः कुछ नहीं कहते हैं लेने देने के कारण या फिर सुख सुविधाओं के लाभ लेने के कारण शासन पर उंगली नहीं उठा सकते हैं। 

1992 से आज तक मध्य प्रदेश शासन में शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षक वर्ग 1 , विशेष शिक्षक वर्ग 2 और विशेष शिक्षक वर्ग 3 का पद क्यों नहीं बना है अतः सामान्य प्रशासन विभाग अन्य बच्चों की शिक्षा की तरह दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु समुचित कदम उठाया जाना चाहिए और इन विभागों में बैठे महानुभावों को इस ओर ध्यान देकर प्रस्ताव लाना चाहिए प्रदेश शासन के स्थानीय विधायक, मंत्री और जनप्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री को स्कूल शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षक के पदनाम कैडर का प्रस्ताव एवं नियम बनाकर लागू करने हेतु प्रयास करना चाहिए। 

तभी दिव्यांग छात्र-छात्राओं का भविष्य उज्जवल हो सकेगा अन्यथा अंधकार में ही रहेगा इसमें दिव्यांगो की शिक्षा के लिए कार्यरत सभी सरकारी गैर सरकारी एजेंसी, संगठन और संघों को ध्यान आकर्षित करवाना चाहिए ताकि छात्रों को उचित मार्गदर्शन, शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सके इसलिए दिव्यांगों के लिए सोचे और कार्य करे।

वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020-21 की और हम बढ़ रहे हैं परंतु आज तक शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश में आरसीआई एक्ट 1992 की पालना एवं 2016 कानून का पालन नहीं किया जा रहा है इससे लगता है कि मध्य प्रदेश में दिव्यांगों के लिए शिक्षा किस प्रकार की और किस हद तक दी जा रही है। श्रीमान दिव्यांगों के हित में सोचें और कुछ करके दिखाएं 
धन्यवाद! मध्यप्रदेश विशेष शिक्षक

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