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ऑन ड्यूटी सैनिक को उसके अधिकारी के प्रति भड़काना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या अपराध, यहां पढ़िए - ASK IPC

भारत में कर्मचारियों को यह अधिकार प्राप्त है कि हुआ अपने वरिष्ठ अधिकारी के गलत निर्णय पर आपत्ति उठा सकें। मर्यादा में रहते हुए अधिकारी के गलत आदेश का पालन करने से इनकार करना एवं उसके प्रति अपने विचार (सार्वजनिक रूप से नहीं) व्यक्त करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा हो सकता है परंतु यदि कोई व्यक्ति भारतीय सेना के ड्यूटी पर तैनात सैनिक को उसके अधिकारी के प्रति भड़काने या उकसाने का प्रयत्न मात्र करता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 133 के तहत यह एक गंभीर अपराध है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की 133 की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति आर्मी, नेवी, एयर फोर्स के सैनिक जो ड्यूटी पर है तब उनको अपने अधिकारी के खिलाफ विरुद्ध विद्रोह या विरोध के लिए भड़काने या उकसाने का प्रयत्न मात्र करेगा तब वह व्यक्ति धारा 133 के अंतर्गत अपराधी होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 133 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं होते हैं, यह संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई का अधिकार प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को होता है। सजा- इस धारा के अपराध के लिए तीन वर्ष की कारावास एवं जुर्माने से दाण्डित किया जा सकता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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