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आलू के चिप्स का आविष्कार गुस्से में हुआ था, 1 मिनट में पढ़िए मजेदार जानकारी - GK IN HINDI

दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि गुस्से में आप कुछ नहीं कर सकते। मनुष्य को जब गुस्सा आता है तो उसकी क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है। गुस्सा मनुष्य की सफलता का दुश्मन है। लेकिन मूनलेक हाउस रेस्टोरेंट के शेफ जॉर्ज क्रम के लिए उनका गुस्सा ही उनकी सबसे बड़ी सफलता का कारण बना। आप जो पोटैटो चिप्स बाजार से खरीद कर खाते हैं, उनका आविष्कार शेफ जॉर्ज क्रम ने गुस्से में तिलमिलाते हुए किया था।

पोटैटो चिप्स के अविष्कार की मजेदार कहानी 

मूनलेक हाउस रेस्टोरेंट के शेफ जॉर्ज क्रम काफी फेमस थे। इस बात का उन्हें भी पता था कि लोग उनके हाथ से बनाई हुई चीजें खाने के लिए इंतजार करते हैं। अपनी सफलता पर उन्हें थोड़ा अभिमान भी था। 1853 में  एक कस्टमर ने फ्राई पोटैटो यह कहकर वापस कर देता कि ये ड्राय और क्रंची नहीं हैं। गुस्से से तिलमिलाए जॉर्ज ने आलू को सबसे पतले आकार में काटा, ट्राई किया और उसमें सिंपल नमक डालकर सर्व कर दिया। 

पोटैटो चिप्स के कारण जॉर्ज क्रम को पहचाना जाता है

जॉर्ज ने कभी उम्मीद नहीं की थी कि ग्राहक को इतना पसंद आएगा। ग्राहक की तारीफ सुनकर दूसरे लोगों ने भी पोटैटो चिप्स को ट्राई किया और उन्हें भी काफी पसंद आया। इस प्रकार जॉर्ज क्रम द्वारा गुस्से में बनाई गई एक डिश 'पोटैटो चिप्स' दुनिया भर में मशहूर हो गई। पोटैटो चिप्स के कारण जॉर्ज क्रम केवल न्यूयॉर्क ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पहचाने जाते हैं। जॉर्ज क्रम को आलू के चिप्स के अविष्कार का पेटेंट नहीं मिला क्योंकि वह अफ्रीकन अमेरिकन थे। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article (current affairs in hindi, gk question in hindi, current affairs 2019 in hindi, current affairs 2018 in hindi, today current affairs in hindi, general knowledge in hindi, gk ke question, gktoday in hindi, gk question answer in hindi,)


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