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नींद आती है तो पलके भारी क्यों हो जाती हैं, नींद में वजन होता है क्या? - INTERESTING SCIENCE IN HINDI

Why do our Eyelids feel heaviness, Is there any weight in the sleep? 

हमारे शरीर के लिए नींद उतनी ही महत्वपूर्ण क्रिया है। जितनी की अन्य क्रियाएं जैसे- पाचन, श्वसन, रक्त परिसंचरण, उत्सर्जन आदि। "एक अच्छी नींद एक अच्छे स्वास्थ्य की निशानी मानी जाती है।" पृथ्वी पर उपस्थित लगभग सभी जीवो को नींद की आवश्यकता होती है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मनुष्य अपने जीवन का लगभग दो तिहाई हिस्सा (2/3) सोने में ही बिताते हैं।

मनुष्यों को नींद की क्या आवश्यकता है

नींद हमें अपनी ऊर्जा को भंडारित (restore) करने की शक्ति प्रदान करती है। अगर हम पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेंगे या बहुत लंबे समय तक नहीं सोएंगे तो हमें थकान महसूस होती है। अलग-अलग जीवो में नींद की नींद की अलग-अलग आवश्यकता होती है। जैसे जिराफ और घोड़े खड़े-खड़े ही सो लेते हैं। हाथी सिर्फ 2 घंटे नींद लेता लेता है। बिल्ली कम से कम 15 घंटे की नींद लेती है। जबकि कोअलास (koalas) अपने दिन के 18 घंटे सोने में ही बताते हैं। 

आइए जानते हैं हैं कि जब नींद आती है तो पलके भारी क्यों हो जाती हैं

हमारे शरीर में नींद का आना सिरकैडियन रिदम (Circadium rhytm) द्वारा नियंत्रित होता है। यह हमारे शरीर की प्राकृतिक घड़ी के रूप में कार्य करती है। जो हमारे सोने और जागने की क्रिया को नियंत्रित करती है और प्रत्येक 24 घंटे में यह अपने आप को दोहराती है।

जब हमारी आंखों द्वारा मस्तिष्क तक नींद आने का सिग्नल पहुंचता है। तो मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस मैं स्थित केंद्रक जो कि लगभग 20,000 तंत्रिका कोशिकाओं या नर्व सेल्स का बना होता है, के द्वारा एक विशेष प्रकार के हार्मोन मेलाटोनिन (Meletonin) का श्रावण किया जाता है।

जब हम बहुत ज्यादा थके हुए होते हैं या बहुत लंबे समय से सोए नहीं होते हैं, तो इस हार्मोन मेलाटोनिन का श्रावण बहुत अधिक मात्रा में होता है। जिसके कारण हमें पलकों पर भारीपन महसूस होता है। थकान भी एक प्रकार की साम्यावस्था (होमियोस्टैसिस) की स्थिति है। मतलब थकान होने पर हमारा शरीर अपने आप को को अनुकूलित कर लेता है। सिरकेडिेन रिदम द्वारा पौधों में फूलों का खुलने और बंद होना भी नियंत्रित होता है। 

सरल शब्दों में समझिए

जब मनुष्य का शरीर थकान महसूस करने लगता है तो शरीर के तमाम अंग मस्तिष्क को सिग्नल देकर बताते हैं कि अब वह और अधिक काम नहीं कर सकते। मस्तिष्क को जब इस बात का विश्वास हो जाता है कि शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम नहीं कर सकते हैं तो वह पलकों को बंद होने का आदेश देता है। इस आदेश के साथ एक हार्मोन तेजी से प्रवाहित होता है जो बार-बार पलकों को बंद करने की कोशिश करता है। यदि आप उन्हें खुला रखने की कोशिश करेंगे तो स्वाभाविक है इस संघर्ष में पलके भारी महसूस होंगी।

लेखक श्रीमती शैली शर्मा मध्यप्रदेश के विदिशा में साइंस की टीचर हैं। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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