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शादीशुदा स्त्री/पुरुष खुद को अविवाहित बताकर दूसरी शादी करें तो किस धारा के तहत FIR दर्ज होगी / ASK IPC

शादी-विवाह के मामले में अक्सर धोखेबाजी होती रहती है। कभी लुटेरी दुल्हन तो कभी जालसाज दूल्हा। कई बार शादीशुदा महिला या पुरुष खुद को अविवाहित बताकर दूसरी शादी कर लेते हैं। यह भी एक प्रकार की धोखाधड़ी है परंतु भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मामला दर्ज नहीं हो सकता। आइए जानते हैं इस तरह की वैवाहिक मामलों में धोखाधड़ी के लिए आईपीसी में किस धारा के तहत अपराध माना गया है:-

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 495 की परिभाषा:-

जो कोई स्त्री या पुरूष किसी अन्य व्यक्ति से अपनी पहली शादी की बात छिपकर दूसरी शादी करता है, वह व्यक्ति धारा 495 के अंतर्गत दोषी होगा।
【नोट:- 1.यह अपराध मुस्लिम विधि में मान्य नहीं होगा। 2. तलाक शुदा पति-पत्नी पर भी यह अपराध मान्य नहीं होगा।】

भा.द.सं. धारा 494 एवं धारा 495 में अंतर:-

1.धारा 494 कहती है कि अगर कोई स्त्री का पति या पत्नी पहली शादी होते हुए, दूसरी शादी करता है तब अपराध होगा, और शिकायत न्यायालय में पहले पति या पत्नी द्वारा ही लाया जाएगा।
2. धारा 495 कहती है कि अगर कोई पति या पत्नी पहली शादी छुपाकर किसी अन्य स्त्री-पुरूष से शादी कर लेते हैं तब यह अपराध होगा और शिकयत न्यायालय में उसके द्वारा की जाएगी जिससे कपटपूर्ण शादी या शादी की बात छुपाकर, शादी की है। 

भारतीय दण्ड संहिता,1860  की धारा 495 दण्ड का प्रावधान:-

यह अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं होते है। यह अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं,इनकी सुनवाई का अधिकार प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को होता है। सजा- इस अपराध के दोषी  को 10 वर्ष की कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है।

उधारानुसार वाद:- इनाई बीबी का प्रमुख वाद- आरोपी ने अपनी पहले के साथ छ: माह तक वैवाहिक जीवन बिताने के बाद किसी दूसरे पुरूष से विवाह कर लिया और उसके पहले विवाह की बात को छिपाए रखी थी। इस स्थिति में न्यायालय ने आरोपी को धारा 496 के अंतर्गत दोषी ठहराया गया। 
बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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