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परिनिन्दा या चेतावनी की शास्ति का शासकीय कर्मचारी की सेवा के ऊपर क्या प्रभाव पड़ता है / EMPLOYEE and LAW

अमित चतुर्वेदी। परिनिन्दा या चेतावनी की शास्ति, कर्मचारी के ऊपर विपरीत परिणाम रखने वाली हो सकती है।  जब अनुशासनात्मक प्राधिकारी, आचरण पंजी में, कर्मचारी के विरुद्ध कदाचरण के परिणामस्वरूप शास्ति के रूप में, परिनिन्दा या चेतावनी की प्रविष्टि करता है।  

उक्त प्रविष्टि, संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात कदाचरण के परिणामस्वरूप, दंड अतिरिक्त कुछ अन्य नही मानी जा सकती है। सरल शब्दों में, चेतावनी या परिनिन्दा भी स्पष्ट रुप से शास्ति है। उल्लेखनीय हैं इस प्रक्रिया में कदाचरण को शासित करने वाले नियमों का पालन आवश्यक है। परिनिन्दा पद्दोनती हेतु, वरिष्ठता को प्रभावित नही करती है। 

दूसरे शब्दों में, वरिष्ठता, अप्रभावित रहती है। अपितु, विभागीय पद्दोन्नति समिति, समयमान या पद्दोन्नति प्रदाय पर विचार करते समय,  परिनिन्दा को लघु शास्ति होने के विचार में ले सकती है।कर्मचारी की पृष्ठभूमि को विचार में रखते हुए, पूर्ण रूप से यह समिति के निर्णय पर, निर्भर है। Note- परिनिन्दा स्पष्ट रूप से , माइनर पेनाल्टी है। लेख वरिष्ठता के अप्रभावित रहने को इंगित करता है। 
लेखक श्री अमित चतुर्वेदी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में एडवोकेट हैं। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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