कोरोना के 10 मरीजों के लिए 100 डॉक्टर सहित 600 पैरामेडिकल स्टाफ / INDORE NEWS

इंदौर। भारत के सबसे स्वच्छ शहर और मध्यप्रदेश के गौरव इंदौर सिटी में कोरोना वायरस के इन्फेक्शन को रोकने के लिए किए गए इंतजामों में 'मिस मैनेजमेंट' स्पष्ट नजर आता है। ताजा मामला बीमा अस्पताल का है, जिसे कोरोनावायरस के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यहां 100 डॉक्टर और भारी-भरकम पैरामेडिकल स्टाफ है लेकिन मरीजों की संख्या मात्र 10 है।

बीमा हॉस्पिटल: हर रोज 1200 मरीज OPD में आते थे

इंदौर के नंदानगर स्थित बीमा अस्पताल में COVID-19 के सिर्फ 10 मरीज बचे हैं, जबकि उनके इलाज के लिए करीब 100 डॉक्टर और अस्पताल का भारी-भरकम स्टाफ लगा रहता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीमा अस्पताल को 9 अप्रैल येलो कैटेगरी में लाने से पहले यहां की OPD में रोजाना करीब 1200 मरीज आते थे लेकिन पिछले लगभग 2 महीने से ऐसे मरीजों के आने पर रोक लगा दी गई थी। 

COVID-19 के 10 मरीजों के लिए 100 डॉक्टर सहित 600 पैरामेडिकल स्टाफ

अब जबकि अस्पताल में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या महज 10 रह गई है, तो बीमा अस्पताल को ग्रीन कैटेगरी में लाने की मांग उठने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस अस्पताल में कोरोना के 10 मरीजों की देखरेख के लिए 100 डॉक्टरों सहित कुल 600 से ज्यादा स्टाफ हैं। 

COVID-19 के 10 मरीजों के लिए प्रतिदिन ₹20000000 का खर्चा

अस्पताल के रोज का खर्च करीब 2 करोड़ रुपए है। ऐसे में बीमा अस्पताल आने वाले सामान्य मरीजों का कहना है कि अब इसे ग्रीन कैटेगरी में वापस लाया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को अस्पताल की सुविधाएं मिल सके। 

गरीब कर्मचारियों के इलाज के लिए आरक्षित है बीमा अस्पताल

इस अस्पताल में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) से जुड़े लोग अधिक आते हैं। मगर कोरोना हॉस्पिटल बनाए जाने से ऐसे मरीजों के आना बंद है। ऐसे में जबकि कोरोना के मरीज कम होने लगे हैं, तो लोग इस अस्पताल को जल्द से जल्द येलो से ग्रीन कैटेगरी में बदलने की मांग कर रहे हैं।

जिला प्रशासन समीक्षा नहीं करता, इसलिए पैसा पानी की तरह बह रहा है

नंदानगर स्थित बीमा अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल अधिकारी सुब्रा मुखर्जी ने बीते दिनों मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि यहां पर अब कोरोना के 10 मरीज ही बचे हैं। इसलिए अस्पताल को ग्रीन कैटेगरी में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बाबत अभी तक शासन से लिखित में आदेश नहीं मिला है। वहीं अस्पताल के सुप्रिंटेंडेंट सुचित्रा बोस ने कहा कि येलो कैटेगरी में आने के बाद अस्पताल का नियंत्रण प्रशासन के हाथ में चला गया है। इसके बाद यहां के डॉक्टर और अन्य स्टाफ प्रशासन के दिशा-निर्देश के मुताबिक कोरोना मरीजों के इलाज में सहयोग कर रहे हैं। 

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