Loading...

सरकारी बचत योजनाओं में ब्याज दर घटाने की तैयारी: बुरी खबर | NATIONAL NEWS

नई दिल्ली। आम बजट 2020 के बाद आम आदमी के लिए एक और बुरी खबर है। सरकारी बचत योजनाएं जैसे PPF, किसान विकास पत्र, NSC आदि की ब्याज दरें घटाने की तैयारी चल रही है। सरकार का तर्क है कि बैंक FD से ज्यादा ब्याज के कारण लोग बैंक से पैसा निकालकर सरकारी योजनाओं में लगा रहे हैं। बैंकों को आपत्ति है इसलिए सरकारी बचत योजनाओं की ब्याज दर बैंकों के आसपास ही होगी।

शासकीय लघु बचत योजनाओं की ब्याज दर बाजार से जुड़ेगी

आर्थिक कार्य विभाग के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने अगली तिमाही में लघु बचत ब्याज दरों को घटाने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि लघु बचत योजनाओं की ब्याज दर बाजार में बैंकों की ब्याज दर की आसपास होंगी। चक्रवर्ती ने कहा कि देश में हमारे पास वर्तमान में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये लघु बचत योजनाओं में और करीब 114 लाख करोड़ रुपये बैंक जमा के रूप में हैं। इससे बैंकों की देनदारी इन 12 लाख करोड़ रुपये से प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल वैसी स्थिति है जब कोई कमजोर इंसान किसी ज्यादा शक्तिशाली व्यक्ति को नियंत्रित करने लगे। कमोबेश लघु बचतों की ब्याज दर का कुछ जुड़ाव बाजार दरों से होना चाहिए जो बड़े स्तर पर सरकारी प्रतिभूतियों से प्रभावित होती हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि श्यामला गोपीनाथ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन ब्याज दरों को बाजार दरों से जोड़ने का काम चल रहा है। इस तिमाही के लिए ब्याज दरों का इंतजार कीजिए, यह आपको लगभग-लगभग अच्छे संकेत देगा।

छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा ब्याज दरें

>> पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund (PPF interest Rate): 7.9%
>> सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Scheme Interest Rate): 8.4%>> वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme Interest Rate): 8.6%
>> नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स (National Savings Certificate (NSC) Interest Rate): 7.9%
>> किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra (KVP) Interest Rate): 7.6%
>> नेशनल सेविंग्स मंथली इनकम अकाउंट (Monthly Income Scheme Account, MIS Interest Rate): 7.6%
>> नेशनल सेविंग्स रेकरिंग डिपॉटिज अकाउंट (National Savings Recurring Deposit Account Interest Rate): 7.2%

बैंकों को आपत्ति है, सरकारी बचत योजनाओं में ज्यादा ब्याज क्यों

उन्होंने कहा कि अभी कुछ सांकेतिक मुद्दे हैं जिन पर काम किया जा रहा है। बैंकों का कहना है कि लघु बचतों पर ऊंचे ब्याज से उन्हें अपनी जमा ब्याज दरों में कटौती करने में दिक्कत आ रही है। एक साल की परिपक्वता अवधि के लिए बैंकों की जमा ब्याज दर और लघु बचत दरों में करीब एक प्रतिशत का अंतर है। उन्होंने कहा कि भले सरकार लघु बचत योजनाओं पर निर्भर नहीं है, लेकिन सरकार का इन योजनाओं को समाप्त करने का कोई इरादा नहीं है क्योंकि लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।