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बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का केजरीवाल और कमलनाथ के संदर्भ में बयान | INDORE NEWS

इंदौर। भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का मानना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा है, हालांकि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के लोग दिल्ली में सरकार बनाने का दावा कर रहे थे। 

विकास नहीं फ्री के मुद्दे पर जीते हैं केजरीवाल

विजयवर्गीय ने कहा- दिल्ली चुनाव में विकास क्या, फ्री मुद्दा था। सब चीज फ्री। मुद्दा फ्री था। 6 महीने के अंदर फ्री की घोषणाएं हुईं हैं, उसका चुनाव में असर हुआ है। विजयवर्गीय भाजपा का वाेट प्रतिशत बढ़ा है। हमारी सीट भी बढ़ी हैं। हां, कांग्रेस जरूर साफ हो गई है। यदि पूरे परिणाम को देखें तो भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर किया है, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के प्रदर्शन में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि संख्या बल के आधार पर आम आदमी की सरकार बन रही है। मैं उन्हें बधाई देता हूं।

बंगाल हम बिना चेहरे के जीतेंगे

दिल्ली में किसी चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात पर कहा कि चेहरा हो या ना हो, यह अलग विषय है। हमने बिना चेहरे के त्रिपुरा, हरियाणा, गुजरात में सरकार बनाई। बंगाल में बिना चेहरे के सरकार बनाएंगे। हम दिल्ली चुनाव को लेकर मंथन जरूर करेंगे कि संगठनात्मक मजबूती वहां पर बने।

कमलनाथ को यह बयान बहुत महंगा पड़ेगा

आदिवासियों को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर विजयवर्गीय ने कहा- कमलनाथ ने बहुत ही जहरीला बयान दिया है। कांग्रेस की नीति रही है कि फूट डालो और राज करो। पहले हिंदू-मुस्लिम को लड़ाया, फिर भारत का विभाजन हुआ। अभी कमलनाथ का जो बयान है वह हिंदुओं को बांटने वाला है। कैलाश ने कहा कि भगवान राम ने शबरी के बेर खाए, निषाद राज को गले लगाया। सब राम को आराध्य मानते थे। आदिवासी का हिंदू नहीं मानना बहुत बड़ा राजनीतिक षड़यंत्र है, जो सोनिया गांधी के निर्देश पर हो रहा है। मुख्यमंत्री को यह बयान बहुत महंगा पड़ेगा।

आदिवासियों के मामले में कमलनाथ ने क्या कहा था

जनगणना के दौरान आदिवासियों को हिंदू दर्शाने संबंधी आरएसएस की मुहिम पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नाराजगी जाहिर की थी। नाथ ने कहा था कि आदिवासियों को उनकी इच्छा और अनादिकाल की मान्यताओं के विरुद्ध अपनी धार्मिक पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं करने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि ऐसा लगता है कि देश में एनआरसी लागू करने में असफल होने पर संघ अपने इरादे दूसरे रास्ते से लागू करना चाहता है। आरएसएस का यह एक और विभाजनकारी मंतव्य है जो देश के सामने आया है। संघ यदि ऐसे किसी अभियान को आकार देगा तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।