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DAVV की रेपुटेशन के लिए छात्राओं की इज्जत खतरे में | INDORE NEWS

इंदौर। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के गर्ल्स हॉस्टल (Girls Hostel of Devi Ahilyabai University) में एक सफाई कर्मचारी लड़कियों के बाथरूम में झांकता रहता था। वार्डन को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब लड़कियों ने उसे देखा और हंगामा मचाया तो कुलपति डॉक्टर रेणु जैन तेजी से एक्टिव हुई लेकिन लड़कियों को बचाने के लिए नहीं बल्कि चुप कराने के लिए। उनका मानना था कि हाल ही में यूनिवर्सिटी को ए प्लस ग्रेड मिला है। इस तरह की मामले सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी की बदनामी होगी। उन्हें छात्राओं की बदनामी की कोई फिक्र नहीं थी। यदि सफाई कर्मचारी नहीं कुछ वीडियो बना लिए हो तो वह क्या कर सकता है। इस तरफ कुलपति ने चिंता ही नहीं की।

सफाई कर्मी को नहीं पकड़ा, लड़कियों से मिलने आए अधिकारी

घटना सात दिसंबर को कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल (Kamla Nehru Girls Hostel) में हुई। यहां की सफाई का ठेका सिक्युरिटी ब्यूरो ऑफ इंडिया को दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शी (हॉस्टल में ही रहने वाली लड़की) के मुताबिक एक लड़की बाथरूम में गई थी। उस दौरान सफाईकर्मी अंकित तंबोली बाथरूम में झांक रहा था। उसने शोर मचाया तो वह भाग निकला। तत्काल हॉस्टल प्रबंधन को घटना बताई। वार्डन डॉ. नम्रता शर्मा ने कुलपति डॉ. रेणु जैन व अन्य अधिकारियों को बताया। वे तुरंत हॉस्टल पहुंचे और लड़कियों से बातचीत की।

वार्डन में नौकरी बचाने फाइल तैयार कर दी, रजिस्ट्रार दवाई रहे

इस बीच वार्डन ने फाइल तैयार कर प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दी। इसके बाद सफाईकर्मी को हटा दिया गया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे मामले को दबाने में लगा रहा। सूत्रों के मुताबिक जिम्मेदार तर्क दे रहे थे कि कुछ दिन पहले ही विश्वविद्यालय को 'ए+' ग्रेड मिली है। ऐसी घटना से छवि खराब हो सकती है। इसके चलते कुलपति, अधिकारियों और चीफ वार्डन ने कोई कार्रवाई नहीं की। फाइल रजिस्ट्रार के पास रखी रही।

सब कुछ हुआ, बस FIR दर्ज नहीं कराई

प्रभारी कुलपति डॉ. आशुतोष मिश्रा को जानकारी लगते ही उन्होंने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई, जिसमें डॉ. वृंदा टोकेकर, डॉ. माया इंगले और डॉ. रेखा को शामिल किया गया।
छात्र संगठन का दबाव बढ़ने के बावजूद चीफ वार्डन डॉ. अजय तिवारी पुलिस में शिकायत करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। बाद में प्रभारी कुलपति के निर्देश पर वार्डन डॉ. नम्रता शर्मा ने भंवरकुआं थाने में आवेदन दिया।
शाम को भारी विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चीफ वार्डन डॉ. तिवारी को हटा दिया। साथ ही हॉस्टल का आनन-फानन में दौरा किया।

दो बार छात्रा से मिलने गईं कुलपति, बचाने नहीं, चुप कराने के लिए

घटना की जानकारी लगते ही कुलपति डॉ. रेणु जैन रविवार को हॉस्टल पहुंचीं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित छात्रा से मुलाकात नहीं हुई। एक दिन बाद फिर कुलपति ने हॉस्टल का दौरा किया। कई छात्राओं से बातचीत की। उस दौरान दोनों छात्राओं से चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक मामला दबाने के लिए उन्हें भी कुलपति ने समझाने की कोशिश की। इस दौरान कुलपति ने एक बार भी कोशिश नहीं की कि सफाई कर्मी को पकड़ा जाए और उससे पूछा जाए कि उसने अब तक कितनी बार ऐसा किया और उसके मोबाइल में कितने वीडियो हैं।

पॉलीटिकल प्रेशर बना तो दबाव में आई कुलपति

घटना सामने आने के बाद छात्र संगठन ने विरोध शुरू कर दिया। युवक कांग्रेस के अभिजीत पांडे और लक्की वर्मा ने डॉ. मिश्रा से मुलाकात की। उन्होंने घटना को लेकर विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों के रवैए पर नाराजगी जताई। एनएसयूआई के उपाध्यक्ष जावेद खान हॉस्टल के विद्यार्थियों को लेकर प्रभारी कुलपति से मिले और चीफ वार्डन को हटाने की मांग की। छात्र नेता ग्रीष्मा द्विवेदी, विवेक सोनी और अखिल हार्डिया ने भी अधिकारियों को घेराव किया। दो घंटे तक कुलपति कक्ष में धरना दिया। बाद में एबीवीपी के नगर मंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी करन मूलचंदानी व 50 से ज्यादा छात्र-छात्राएं आए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के अलावा एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग रखी।

कुछ महत्वपूर्ण बातें

कुलपति डॉक्टर रेणु जैन ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें 7 दिसंबर को इस घटना की जानकारी मिल गई थी।
उन्होंने हॉस्टल का निरीक्षण किया और छात्राओं से बातचीत की लेकिन उस एजेंसी को तलब नहीं किया जिसके अनुबंध पर सफाई कर्मचारी गर्ल्स हॉस्टल आता था।
कुलपति डॉक्टर रेणु जैन 6 दिन तक सफाई कर्मचारी का नाम पता नहीं कर पाई।
उन्होंने 6 दिन तक इस मामले में पुलिस की कोई मदद नहीं ली।
प्रभारी रजिस्ट्रार अनिल शर्मा का कहना है कि उन्होंने एजेंसी से कहा था कि वह पुलिस कार्रवाई करें। बड़ा अजीब तर्क है। घटना यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में हुई, एजेंसी पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
प्रभारी अनिल शर्मा का कहना है कि एजेंसी ने उन्हें जानकारी देने में देरी की लेकिन प्रभारी रजिस्ट्रार ने एजेंसी को ब्लैक लिस्ट नहीं किया। एजेंसी के प्रति सहानुभूति बनी हुई है।