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शनि अमावस्या और पितृपक्ष अमावस्या : 20 साल के बाद का संयोग | SHANI OR PITRAPAKSH AMAVASYA

नई दिल्ली। 28 सितंबर शनिवार के दिन पितृपक्ष समाप्त हो रहा है. पितृ पक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या को समाप्त होता है. इस बार अमावस्या के दिन एक अद्भुत संयोग बन रहा है. पितृपक्ष को हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना जाता हैं, वही इस समय पितृपक्ष चल रहा हैं, यह बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता हैं 28 सितंबर को शनि और अमावस्या के संयोग से शनि अमावस्या का संयोग बन रहा है.

इससे पहले 1999 में इस तरह का संयोग बना था. इस विधि से पितरों की विदाई कर आप इस दिन को अपने लिए सौभाग्यशाली बना सकते हैं. पितृपक्ष का आरम्भ पूर्णिमा के दिन होता हैं और अंत अमावस्या पड़ने पर, इस बार पितृपक्ष के अंतिम दिन बहुत ही शुभ संयोग बन रहा हैं ​वही पितृपक्ष के आखिरी दिन शनिवार और अमावस्या का संयोग 20 साल के बाद बन रहा हैं इससे पहले यह शुभ संयोग 1999 में बना था। वही शनि और अमावस्या के इस शुभ संयोग से 28 सितंबर को शनि अमावस्या का भी महत्व अधिक बढ़ जाता हैं ऐसे में आप अपने पितरों की विदाई को अपने व परिवार के लिए शुभ बना सकते हैं।

पितृपक्ष अमावस्या और शनि अमावस्या पर क्या करें / Pitru Paksha Amavasya and Shani Amavasya ko kya or kaise kare


बता दें कि पितृपक्ष का आखिरी दिन और शनि अमावस्या के शुभ संयोग में गरीबों, असहायों की सेवा करने से कर्मदाता देवता भगवान शनि प्रसन्न होते हैं वही इसके अलावा इस दिन पितरों की विदाई से उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया जा सकता हैं। पितृपक्ष अमावस्या और शनि अमावस्या (Pitrupaksha Amavasya and Shani Amavasya) के संयोग का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए इस दिन काले तिल, उड़द, गुड़, जूता, वस्त्र, जौ, आदि को पितरों को याद करते हुए किसी जरूरतमंद या फिर गरीब को दान कर दें।

वही पितृपक्ष अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती हैं वही ऐसा भी कहा जाता हैं कि पितर श्राद्ध पक्ष के समय पीपल के पेड़ पर अपना निवास स्थान बनाते हैं।.