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HIGH COURT: झूठा दहेज एक्ट दर्ज कराने वाली महिला को तलाक की सजा

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने झूठा दहेज एक्ट दर्ज कराने वाली महिला को तलाक की सजा दी है। उसने 5 साल तक अपने पति को दहेज एक्ट में फंसाने की धमकी देकर पति का उत्पीड़न किया। उसका पूरा वेतन रख लेती थी। संपत्ति अपने नाम कराना चाहती थी। कहती थी, जो कहती हूं वो नहीं किया तो मां बाप को भी जेल भिजवा दूंगी। 
जस्टिस हीमा कोहली और आश मेनन की बैंच ने कहा, ''महिला चाहती थी कि उसका पति महज 50 रुपये प्रतिदिन के खर्च के हिसाब से पैसा अपने पास रखकर पूरा वेतन उसे दे दे।'' बैंच ने कहा कि यह बात दहेज उत्पीड़न के आरोप में पति और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के बरी होने से भी साबित होती है। हाईकोर्ट ने महिला की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की वजह से उसने मुकदमा दर्ज कराया था।

कोर्ट ने कहा कि पत्नी की रवैये से पति तनाव में था और अपने माता-पिता के हितों को लेकर भी डर के जीवन बिता रहा था क्योंकि वह (महिला) उसके सिर पर मुकदमों का तलवार लटकाए हुए थी। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला वर्ष 2005 से लेकर 2010 तक ऐसा करने में सफल भी रही। बैंच ने कहा कि इन तथ्यों पर विचार करने के बाद फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक को मंजूरी देने के फैसले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए महिला की ओर से फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट में पेश मामले के अनुसार महिला ने पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ न सिर्फ दिल्ली बल्कि गाजियाबाद में भी दहेज उत्पीड़न व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था।

संपत्ति नाम करवाने का दबाव बनाया
पति की ओर से तलाक के लिए दाखिल याचिका के अनुसार, जून 2005 में दोनों की शादी हुई थी। दंपति के तीन बच्चे हैं। पति ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसकी पत्नी का रवैया माता-पिता और बहन के प्रति काफी खराब रहा। वह सारी संपत्ति अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाने लगी।

दहेज मांगने का आरोप
पत्नी ने पति और ससुराल के अन्य लोगों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वाले उसके माता-पिता से 100 गज जमीन लेने के लिए उसे परेशान कर रहे हैं।