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GST RETURN FORM 9C: “ट्रू’ और “फेयर’ की जगह ट्रू और करेक्ट क्यों

इंदौर। देश भर के सीए और कास्ट अकाउंटेंट नाराज हैं। वो GST RETURN FORM 9C में बदले गए एक शब्द से नाराज हैं। सरकार ने फार्म में 'TRUE OR FAIR' की जगह TRUE OR CORRECT कर दिया है। सीए और कास्ट अकाउंटेंट्स (CA AND COST ACCOUNTANTS) का कहना है इस तरह से सरकार ने उन्हे पूरी तरह से जिम्मेदार बना दिया है। 

“ट्रू’ और “फेयर’ की जगह ट्रू और करेक्ट क्यों

इसमें लिखा है- मैं सत्यापित करता हूं कि जो भी सूचना दी गई है, वह मेरी जानकारी के अनुसार पूरी तरह सत्य और सही है। इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है। सीए और ऑडिटर को इसमें “सत्य’ और “सही’ (ट्रू और करेक्ट) शब्द को लेकर आपत्ति है, क्योंकि इससे कारोबारी द्वारा व्यापार के दौरान कोई भी चूक करने या किसी तरह की जानकारी देने में गलती करने पर जिम्मेदारी ऑडिटर पर आ रही है। पहले “ट्रू’ और “करेक्ट’ शब्द की जगह “ट्रू’ और “फेयर’ लिखा रहता था (अब इसमें “फेयर’ शब्द को बदलकर “करेक्ट’ शब्द कर दिया है। यानी, जानकारी सही ही होना चाहिए। 

भाषा ऐसी है कि जैसे ऑडिटर ही पूरी तरह जिम्मेदार हो

वहीं, जीएसटी रिटर्न में यह भी तय किया गया है कि ऑडिटर तय करेंगे कि किस वस्तु पर कितना टैक्स लगेगा? इस पर व्यापारियों को भी आपत्ति है कि जब कारोबार वह कर रहे हैं तो ऑडिटर किस तरह इसे तय कर सकता है? वहीं, खुद ऑडिटर के लिए भी यह संभव नहीं होगा कि वह हर बिल को देख सके। सीए अभय शर्मा ने कहा कि करदाता द्वारा साल भर में किए गए व्यव्हार का सत्यापन ऑडिटर को करना है। इसकी भाषा ऐसी है कि जैसे ऑडिटर शपथपूर्वक सत्यापन कर रहा हो और पूरी तरह इसी की जिम्मेदारी हो, यह असंगत है।

जीएसटी सालाना रिटर्न की तारीख छह माह बढ़ाने की मांग

जीएसटी के सालाना रिटर्न को भरने के लिए अंतिम तारीख 30 जून है, लेकिन इसे भरने में कारोबारी, कर सलाहकार परेशान हो रहे हैं। इसे लेकर मप्र टैक्स लॉ बार एसो., कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन, नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफेशनल्स ने सोमवार को सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर नीरव मल्लिक व स्टेट टैक्स कमिश्नर डीपी आहूजा को ज्ञापन देकर अंतिम तारीख छह माह बढ़ाने की मांग की। मप्र टैक्स लॉ बार एसो. के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया, सीटीपीए अध्यक्ष एके गौर, एक्शन कमेटी के सदस्य अमित दवे ने समस्याओं का पत्र भी सौंपा।