कांग्रेस: मंत्रियों के बीच विभाग भी नहीं बांट पाए तीनों दिग्गज, दिल्ली दरबार जा पहुंचे | MP NEWS

27 December 2018

भोपाल। कांग्रेस में एकता का ऐलान करने वाले दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया बात-बात पर देवरानी-जिठानी की तरह झगड़ पड़ते हैं और मामला दिल्ली दरबार पहुंच जाता है। मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। हर कोई कमाई और ताकत वाले विभाग के लिए अड़ गया है। अब मामला फिर से राहुल गांधी के पास पहुंच गया है। मध्यप्रदेश के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा भी राहुल गांधी ही करेंगे। 

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि बुधवार को सुबह से लेकर देर रात तक विभागों को लेकर माथापच्ची चलती रही। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच वित्त, गृह और परिवहन विभाग को लेकर मामला फंस गया है। सिंधिया ने इस मसले पर पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से भी बात की। सिंधिया इससे पहले अपने गुट के लिए उप मुख्यमंत्री का पद भी चाहते थे और यह मामला भी दिल्ली में ही सुलझा था। अब विभाग भी वहीं बंटेंगे। 

एक रिपोर्ट के अनुसार पेंच गृह मंत्रालय को लेकर है। कमलनाथ, बाला बच्चन को ये विभाग देना चाहते हैं तो सिंधिया गृह और परिवहन तुलसी सिलावट को दिलवाने पर अड़े हैं। दिग्विजय वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर डॉ. गोविंद सिंह को गृह विभाग के लिए योग्य मान रहे हैं। साथ ही बेटे जयवर्धन को वित्त दिलाना चाहते हैं। 

मंत्री ही रहेंगे विभाग के सर्वे-सर्वा
सभी को कैबिनेट मंत्री बनाने के पीछे दिग्विजय को मुख्य किरदार माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल गठन से पहले दिग्विजय ने दलील रखी थी कि कैबिनेट और राज्यमंत्री के बीच काम का बंटवारा होने से जनता से जुड़े काम नहीं हो पाते। इसलिए मंत्री ही विभाग का सर्वे-सर्वा रहे और सरकारी काम आसानी से हो सके। कैबिनेट की बैठक में भी नाथ ने इस बात के संकेत दिए कि अब विभाग मुख्यमंत्री कार्यालय से नहीं, मंत्री ही उसे चलाएंगे। 

कमलनाथ ने कहा: लोकसभा चाहिए तो फ्रीहेंड दीजिए
कमलनाथ की ओर से कहा गया है कि यदि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अच्छे नतीजे चाहिए तो उन्हें फ्री हैंड देना होगा। दिग्विजय को बुधवार शाम दिल्ली जाना था, लेकिन उन्होंने अपना तय कार्यक्रम रद्द कर दिया। सूत्रों के अनुसार ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में सचिव कमलेश्वर पटेल, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को राहुल गांधी के कोटे से ही मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसलिए इन तीनों को दिल्ली से महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने के संकेत हैं। 

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