जिस आश्रम में मूक-बधिर का बलात्कार हुआ, इन रसूखदारों का भी आना-जाना था | MP NEWS

02 October 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में संचालित स्नेहालय शेल्टर होम जिसमें मूक-बधिर महिला के साथ बलात्कार हुआ। उसमें विदेशी लोगों का आना जाना तो था ही साथ ही कई रसूखदार नेता और अफसरों का भी आना जाना था। कुछ तो स्नेहालय के पदाधिकारी भी हैं। ग्वालियर के पत्रकार अभिषेक शर्मा ने उन सभी रसूखदारों के नाम खोज निकाले हैं जो स्नेहालय शेल्टर होम में आते जाते थे या इसके पदाधिकारी थे। सब अपनी सफाई तो पेश कर ही रहे हैं साथ ही स्नेहालय शेल्टर होम के संचालक डॉक्टर बीके शर्मा को अच्छा आदमी भी बता रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ रसूखदारों ने तो विजिटर बुक में ​यह भी लिखा है कि यदि कहीं स्वर्ग देखना हो तो यहां आएं। 

ये है स्नेहालय के संचालक डॉक्टर बीके शर्मा की कुण्डली
बच्चों के डॉक्टर रहे बीके शर्मा ने ग्वालियर चिल्ड्रंस चेरिटी एंड डा. मीना शर्मा मेमोरियल फाउंडेशन, यूके और ग्वालियर हाॅस्पिटल एंड एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट एंड स्नेहालय नाम से दो संस्थाएं शुरू कीं। मीना शर्मा उनकी पहली पत्नी थी। उनके निधन के बाद उन्होंने संस्था में ही काम करने वाली भावना तिवारी से शादी कर ली। पिछले कुछ सालों से भावना को ही स्नेहालय की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी थी। यहां विदेशियों का आना-जाना तो था ही संस्था में राजनीति, प्रशासन और समाजसेवा में अपना रसूख रखने वाले लोग भी आते जाते थे। ये हैं कुछ प्रमुख नाम: 

पीएस बिसेन, पूर्व कुलपति, जेयू व स्नेहालय के को-चेयरमैन
मैं सिर्फ नाम के लिए ही को-चेयरमैन था। आश्रम संचालन से जुड़े फैसले मुझसे पूछकर नहीं लिए जाते थे। मैं तो वहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को देखने जाता था और उनके अतिथियों के आने की रूपरेखा को लेकर ही मुझसे बात होती थी। 

अखिलेंदु अरजरिया, रिटायर्ड आईएएस एवं सलाहकार, स्नेहालय आश्रम
मैं सिर्फ नाम के लिए ही सलाहकार था स्नेहालय में। मुझसे तो सिर्फ यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अतिथियों काे बुलाने को लेकर ही चर्चा होती थी। वैसे मुझे वहां कभी भी कुछ गलत नहीं लगा। मेरे हिसाब से वहां के चौकीदार द्वारा किए गए जुर्म को दबाने और बदनामी रोकने के डर से सारा प्रबंधन लपेेटे में आ गया अन्यथा डॉ बीके शर्मा काम तो अच्छा कर रहे थे। बाकी जांच में सामने आएगा। 

बाल खांडे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं स्नेहालय से लंबे समय से जुड़े रहे
मैं आखिरी बार 5 साल पहले गया था स्नेहालय। इसके बाद कभी नहीं गया। दूर से देखने पर तो वहां सबकुछ अच्छा लगता रहा है। लेकिन अंदर क्या चल रहा है, वो कैसे पता चलता। यह घटना हो गई तो मामला खुल गया। 

डॉ. हरिशचंद्र पिपरिया, चिकित्सक एवं स्नेहालय से जुड़े रहे
मैं वहां दो से तीन बार गया। लेकिन वहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ही गया। ट्रस्ट या उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर मुझे कभी नहीं बताया गया। दूर से देखने पर मुझे भी यही लगा कि यहां मंदबुद्धि बच्चों व अन्य मरीजों की देखरेख होती है, लेकिन इस घटना के बाद अब समझ आता है कि यहां सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। 

चंद्रमोहन नागौरी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं स्नेहालय से जुड़े रहे
मैं स्नेहालय जाता था, लेकिन समाजसेवा के कार्यों में भाग लेने। अब हम कोई जासूस ताे है नहीं, कि अंदर क्या चल रहा है, हमें पता लग जाए लेकिन घटना शर्मनाक हुई। हालांकि मंदबुद्धि मरीजों के लिए काम तो वहां अच्छा हो रहा था। 

रसूखदारों ने क्या कुछ लिखा था विजिटर्स बुक में 
डॉ. डीएस चंदेल, पूर्व कुलसचिव जेयू एवं संगीत विवि और मंत्री माया सिंह के नजदीकी: यह शानदार जगह है।  
अजय त्रिपाठी, रिटायर्ड एडिशनल एसपी: उस आत्मा को जिसने यह पुनीत कार्य शुरू किया (डॉ बीके शर्मा) शत-शत नमन। 
आरबी दीक्षित: स्नेहालय मंदबुद्धि बालकों की जो सेवा कर रहा है, वह अद्वितीय सेवा है। 
बाल खांडे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता:  अगर स्वर्ग को देखना चाहें तो स्नेहालय आकर देख लें। 
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