खुद को बचाने में जुटे अधिकारी: भोपाल समाचार की खबर पर हड़कंप | MP NEWS

27 August 2018

भोपाल। हिंदी न्यूज पोर्टल भोपाल समाचार डॉट कॉम की खबर से हड़कंप की स्थिति बन गई है। अब सीएम शिवराज सिंह की सुरक्षा में तैनात तमाम अधिकारी खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मासूम बच्चों की तरह बहाने बनाए जा रहे हैं। मामला सीएम शिवराज सिंह की सुरक्षा का है। होशंगाबाद में अटल जी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में वो बिना लाइफ जैकेट के नाव में सवार हो गए थे। नाव नर्मदा नदी की धारा तक पहुंच गई थी। बारिश का मौसम के चलते अनहोनी की संभावना भी थी। भोपाल समाचार ने यह मुद्दा उठाया था। 

सिर्फ बैठने के लिए थी नाव, CM और VIP खड़े हो गए
मामले में एक और लापरवाही यह भी उजागर हुई है कि जिस बोट से सीएम को नर्मदा की जलधारा में ले जाया गया था, उसमें सिर्फ बैठने की ही व्यवस्था थी। जिस समय बोट को बीच जलधारा में ले जाया गया था उस दौरान सभी वीआईपी बोट के अंदर खड़े हो गए। लोगोें ने ना केवल खुद की जान को खतरे में डाला बल्कि जान की बाजी खेल रहे सीएम शिवराज सिंह को भी नहीं रोका। 

जिम्मेदार अधिकारियों की मासूम दलीलें
सीएम जैसे ही बोट के करीब आए धक्का-मुक्की का माहौल बन गया। होमगार्ड कमांडेंट आरकेएस चौहान समेत अन्य अधिकारी बोट के पास खड़े थे, लेकिन सीएम सहित अन्य वीआईपी को बोट में चढ़ाने के पहले लाइफ जैकेट ही पहनाना भूल गए।
सवाल यह है कि: यदि सीएम लाइफ जैकेट भूल गए तो कमांडेंट आरकेएस चौहान क्या कर रहे थे। उन्होंने याद क्यों नहीं दिलाया। 

केसी जैन, आईजी, होशंगाबाद रेंज का कहना है कि सीएम की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया था, पुलिस जवानों समेत अधिकारी नजर रखे हुए थे। बिना लाइफ जैकेट के सीएम व वीआईपी बोट में जाने के मामले से संबंधित तथ्य जुटाए जा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ली जाएगी। 
सवाल यह है कि: अधिकारी नजर रखे हुए थे तो क्या उन्हे यह भी नहीं दिखा कि सीएम लाइफ जैकेट नहीं पहने हुए हैं। ऐसे अज्ञानी अधिकारी नौकरी में क्यों हैं। इन्हे सस्पेंड करके इनकी फिर से भर्ती परीक्षा होनी चाहिए। 

महान भारत सागर, डीजी, होमगार्ड मप्र का कहना है कि बोट के अंदर सीएम व वीआईपी का लाइफ जैकेट पहनना जरूरी था, यदि ऐसा नहीं हुआ है तो गंभीर है। इस संबंध में होमगार्ड अधिकारियों से टीप ली जाएगी।
सवाल यह है कि: टीप लेने से क्या सिस्टम में सुधार हो जाएगा। क्या किसी गंभीर विभागीय कार्रवाई के लिए हादसे का होना जरूरी है। 

और कौन है जिम्मेदार
होशंगाबाद पुलिस: सीएम व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सेठानीघाट आने के कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने चाक चौबंद व्यवस्था का दावा किया था, बेरीकेट्स लगाए गए थे ताकि अन्य लोग ना आ सकें, लेकिन जैसे ही सीएम व वीआईपी सेठानीघाट पर भीड़ बढ़ गई। पुलिस केवल उपद्रव की स्थिति रोकने का प्रयास करती रही। बोट के अंदर क्षमता से अधिक लोग कैसे पहुंच गए पुलिस को पता ही नहीं। जबकि बोट में जाने वालों की सूची पहले से तैयार थी।

होशंगाबाद जिला प्रशासन: प्रशासनिक अधिकारी दो दिनों से सीएम के दौरे को लेकर तैयारी में जुटे थे। सीएम के रूट को तय कर लिया गया था। कलेक्टर प्रियंका दास ने खुद व्यवस्थाओं का जायजा लिया लेकिन सीएम के सेठानीघाट पर आने के बाद व्यवस्था चरमरा गई। यानी प्रशासन की सारी तैयारी घटिया थी। कई भाजपा कार्यकर्ता सीएम के पास पहुंच गए। वहीं एडीएम, एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों की सक्रियता नजर ही नहीं आई। प्रशासन यहां केवल यस सर
की मुद्रा में था। 

हेलमेट पर चालान कटता है लाइफ जैकेट पर क्यों नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिना हेलमेट बाइक ड्राइव करने पर चालान काट दिया जाता है तो बिना लाइफ जैकेट नाव की सवारी करने पर चालानी कार्रवाई क्यों नहीं की गई जबकि यह गंभीर गलती करने वाला कोई आम नागरिक नही था। यदि मुख्यमंत्री ही इस तरह की लापरवाहियां करेंगे तो आम जनता से जागरुकता की क्या उम्मीद की जाए। शिवराज सिंह सहित तमाम वीआईपी नेताओं पर जुर्माना तो लगना ही चाहिए। 
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