15 साल पुरानी गाड़ियों की स्क्रेपिंग मामले में सरकार का संसद में जवाब पढ़िए

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 4 फरवरी 2026:
भारत के लोग, दुनिया के लोगों से बहुत अलग होते हैं। यहां मोटर वाहन जितना पुराना होता है, उसके साथ भावनात्मक लगाव उतना ज्यादा हो जाता है। कई लोग तो किसी व्हीकल को अपना लकी व्हीकल मान लेते हैं। उसका इंजन इत्यादि सब कुछ बदलवा देते हैं लेकिन वाहन नहीं बदलते। जबकि सरकार कहती है कि 15 साल पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कर दीजिए। इसके बदले में सरकार मुआवजा भी दे रही है। पढ़िए आज इस मामले को लेकर लोकसभा में सरकार ने क्या जवाब दिया:- 

अब तक लगभग 4.50 लाख गाड़ियों को स्क्रैप किया

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) ने राज्यसभा में देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और पुरानी गाड़ियों को हटाने की नीति पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि, सरकार की 'व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी' अब तेज़ी से ज़मीन पर उतर रही है। आंकड़ों की बात करें तो 30 जनवरी 2026 तक देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 129 रजिस्टर्ड वाहन स्क्रैपिंग सेंटर (RVSFs) खुल चुके हैं और अब तक 4,30,306 पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (स्क्रैप) में बदला जा चुका है।

अपना वाहन स्क्रैप करवाने वालों को मुआवजा भी मिलता है

• राज्यों को प्रोत्साहन: केंद्र सरकार ने राज्यों को इस नीति को बढ़ावा देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। जो राज्य पुरानी गाड़ियों पर टैक्स में छूट देंगे, उन्हें 10 करोड़ से लेकर 200 करोड़ रुपये तक की मदद मिलेगी।
• गाड़ी मालिकों को फायदा: अगर कोई पुरानी सरकारी गाड़ी (15 साल से ज्यादा पुरानी) स्क्रैप की जाती है, तो राज्य को प्रति वाहन 50,000 से 1.5 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, आम जनता की गाड़ियों के लिए यह राशि 5,000 से 20,000 रुपये के बीच तय की गई है।
• फिटनेस सेंटर: गाड़ियों की जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) खोलने पर भी 5 करोड़ से 9 करोड़ रुपये तक की सरकारी मदद दी जा रही है।

रोड एक्सीडेंट का शिकार व्यक्ति के लिए कैशलेस इलाज स्कीम

हादसों के समय सबसे बड़ी चुनौती इलाज के खर्च की होती है। इसके लिए सरकार ने 'कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम 2025' लागू की है। सड़क हादसे के शिकार व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा एक्सीडेंट के पहले 7 दिनों तक मान्य होगी। अस्पताल को निर्देश हैं कि वे घायल व्यक्ति को तुरंत भर्ती करें। बिना जान के खतरे वाले मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक मुफ्त इलाज दिया जाएगा।इसके लिए सरकार ने 'मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड' बनाया है। अस्पतालों को भुगतान 'eDAR' (पुलिस रिपोर्ट) और 'TMS 2.0' (अस्पताल सिस्टम) के जरिए डिजिटल तरीके से होगा।

राह-वीर के लिए बड़ा इनाम

अक्सर लोग कानूनी पचड़ों के डर से सड़क हादसे में घायलों की मदद नहीं करते थे। लेकिन अब सरकार ने 'राह-वीर' (Good Samaritan) योजना के तहत इनाम की राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 25,000 रुपये कर दिया है। यानी जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से घायल को अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार सम्मानित भी करेगी और आर्थिक इनाम भी देगी।

सड़कों को सुरक्षित बनाने के अन्य कदम

नेशनल हाईवे पर जहां बार-बार हादसे होते हैं (ब्लैक स्पॉट्स), वहां साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर और सड़क सुधार के काम किए जा रहे हैं।
अब हर नेशनल हाईवे का निर्माण, डिजाइन और रखरखाव के समय 'रोड सेफ्टी ऑडिट' कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
बड़े शहरों और हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए यातायात के नियमों की निगरानी की जाएगी।
अब नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर पैरामेडिकल स्टाफ और नर्स के साथ एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
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