कांग्रेस को बदलना होगा, चेहरा तो देना होगा: ज्योतिरादित्य सिंधिया | MP NEWS

Wednesday, February 21, 2018

भोपाल। पूर्व मंत्री एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर अपनी बात को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि समय के साथ पार्टी को बदलना होगा। आज देश भर में चेहरा देखकर वोट दिए जा रहे हैं। नगरीय निकाय चुनावों तक में चेहरा देखा जा रहा है, अत: जिन राज्यों में कांग्रेस के पास चेहरा है, वहां उसे चेहरा देना चाहिए। इससे पहले सिंधिया के प्रभावक्षेत्र में चुनाव प्रचार करने गए नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव बयान देकर आए थे कि मप्र में कांग्रेस का कोई चेहरा नहीं होगा। उनके बयानों से दोनों सीटों पर कांग्रेस को नुक्सान हो सकता है, क्योंकि दोनों सीटों की आम जनता भी यह मानती है कि सिंधिया ही कांग्रेस का चेहरा होंगे। 

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस में चुनावों के पहले मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने की परंपरा नहीं है। राज्य में कोलारस और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उप चुनाव में प्रचार के लिए पहुंचे अजय सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा ‘‘पंजाब को छोड़ किसी भी राज्य में कांग्रेस ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा नहीं की। राजस्थान, छत्तीसगढ, दिल्ली या किसी दूसरे राज्य में कभी भी कांग्रेस ने सीएम पद के लिए दावेदार घोषित कर चुनाव नहीं लड़ा है। दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने भी इस सुझाव को खारिज कर दिया था। यादव का भी यही कहना था कि कांग्रेस में चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने की परंपरा नहीं है।

उप चुनाव में प्रचार अभियान के बीच सिंधिया ने एक बार फिर कहा ‘‘मैं तो मानता हूं जरूरत है, और मध्य प्रदेश में आपके पास चेहरे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा या विधानसभा चुनाव ही नहीं आज तो पार्षद या जिला परिषद के चुनाव में जनता चेहरा देखना चाहती है। ये तो वास्तविकता बन गयी है, पूरे देश में। हां, हर पार्टी की नीति हर राज्य के लिये अलग होती है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि हर राज्य में आपको चेहरा देना पड़ेगा, लेकिन जिन राज्यों में आपके पास चेहरे हैं, वहां तो आपको चेहरा देना ही होगा।

उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि वो चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने की बात सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश और राज्यों के संदर्भ में कह रहे हैं। कांग्रेस मध्य प्रदेश में 2003 से सत्ता से बाहर है। राजनीतिक विश्लेष्क मानते हैं कि कांग्रेस की लगातार हार का एक कारण पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में एकजुटता का अभाव होना भी है। प्रदेश कांग्रेस का एक खेमा मानता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने से भाजपा के खिलाफ लडाई आसान होगी। जबकि एक खेमा संयुक्त नेतृत्व की वकालत कर रहा है।

सिंधिया ने कहा, ‘‘न तो भाजपा हर राज्य में चेहरा देती है और न कांग्रेस लेकिन ये जरूर है जहां चेहरे हैं, वहां चेहरों का इस्तेमाल आपको करना चाहिए। ये बयान मैंने पहले भी दिया था और मैं आज भी दे रहा हूं, लेकिन ये केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। मैं पूरे देश की बात कर रहा हूं।’’ मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने अब तक चेहरा घोषित नहीं किया है, इस पर सिंधिया ने कहा, देखिये समय के साथ आपको कांग्रेस पार्टी भी बदलना होगा।

सिंधिया के गुना लोकसभा क्षेत्र के मुंगावली और कोलारस विधानसभा क्षेत्र में 24 फरवरी को उप चुनाव के लिए मतदान होना है। सिंधिया समर्थक मान रहे हैं कि उप चुनावों के परिणाम यदि कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने के लिए आलाकमान पर दबाव बनेगा। उनके समर्थक इन चुनावों को सिंधिया बनाम शिवराज बता रहे हैं। अजय सिंह इससे भी सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, ये किसी नेता की लडाई नहीं है, बल्कि लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच है।

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