विनोद वर्मा के बाद कौन ? पक्ष प्रतिपक्ष से सवाल

Saturday, October 28, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। और आखिर में भाजपा शासित राज्य सरकारों में प्रेस को दबाने की चली होड़ में छतीसगढ़ ने बाज़ी मार ली। छत्तीसगढ़ सरकार की पुलिस पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर रायपुर ले जाने में सफल हुई। राजस्थान में बनने वाला कानून प्रवर समिति के पास है और मध्यप्रदेश में विचार की स्थिति में। प्रथम दृष्टया ये मामले भाजपा सरकार के उत्पीडन के लगते हैं, पर इसके पीछे राजनीति भी है। विनोद वर्मा के श्रमजीवी पत्रकार होने के पक्ष में अनेक तर्क हैं। जनसत्ता के पूर्व सम्पादक श्री ओम थानवी, तो उनके लिए थाने में संघर्ष करने तक उतारू थे। पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ अब तक ऐसी वैसी कोई बात सुनने में नहीं आई, इस पूरी कहानी में कई झोल हैं। 

विनोद वर्मा ने तो अब भी यही कहा कि उनके पास छत्तीसगढ़ के एक मंत्री का सेक्स वीडियो है और यही कारण है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। विनोद वर्मा ने स्पष्ट किया कि "मेरे पास सेक्स वीडियो पेन ड्राइव में है। पुलिस की ओर से पेश सीडी से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।" फिर भी एक अपराधी की तरह उन्हें गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले जाया गया।

पुलिस के मुताबिक़, एफ़आईआर में धारा 384 (रंगदारी वसूलने) और धारा 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बताया गया है कि इसमें विनोद वर्मा का नाम नहीं है। हालांकि पत्रकारों ने पुलिस से एफ़आईआर की प्रति मांगी, लेकिन उन्हें अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई और शायद मिले भी नहीं। विनोद वर्मा बीबीसी के पूर्व पत्रकार रहे हैं, वह अमर उजाला के डिजिटल एडिटर भी रहे है। विनोद वर्मा छत्तीसगढ़ के सामाजिक राजनीतिक मुद्दों पर लंबे समय से लिखते रहे हैं। वे एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के सदस्य भी हैं। 

ट्रांज़िट रिमांड दिए जाने के बाद पत्रकारों से विनोद वर्मा ने कहा, "वो राजेश मूणत की क्लिपिंग है, जो मेरे पास थी। अब बहुत कुछ खुल जाएगा। छत्तीसगढ़ भाजपा ने प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें राज्य सरकार के लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत भी मौजूद थे। राजेश मूणत ने कहा कि सेक्स सीडी सौ परसेंट फ़र्जी है, "मुझे किसी का फ़ोन नहीं आया। मैंने सोशल मीडिया पर ये ख़बर देखी, जिसके बाद पत्रकारों के सामने आया।

अब कुछ घटनाक्रम और सवाल!  कल अर्थात 26 अक्तूबर गुरुवार को दिन में रायपुर छत्तीसगढ़ में उपर्युक्त धाराओं में मुकदमा दर्ज होना और और युद्ध स्तर पर उसी रात गाजियाबाद से गिरफ्तारी के बीच अतिउत्साह साफ नही दिखता है ? पुलिस ऐसी धाराओं में अतिउत्साही कब होती है, किसी से छिपा नहीं है। गंभीर धाराओं के कई मुकदमें बड़े-बड़े नेताओं के विरुद्ध पंजीबद्ध है, पुलिस कर्तव्यनिष्ठ नहीं हो पाती क्यों, जग जाहिर है। वैसे भाजपा और कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच चल रही दुरभी संधि की यह परिणति है। कांग्रेस और भाजपा दोनों में राजेश मूणत के दोस्तों की कमी नहीं है। वैसे कांग्रेस अपने खोये जनाधार को प्राप्त करने के लिए भाजपा के विभीषण लोगों को सुपारी दे चुकी है। दूसरा कांग्रेस का प्रयास विभिन्न सामाजिक संगठनों में घुसपैठ करने के लिए कार्यक्रमों की सीरिज भी शुरू कराई गई है। ये कार्यक्रम ऐसी घटनाओं के जनक होते है, जिनकी परिणति विनोद वर्मा कांड होता है। 

पत्रकारिता अब अधिक जोखिम का काम हो गया है किसी के साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है। कभी प्रतिपक्ष की आवाज़ को बुलंद करने का काम प्रेस करता था। अब पक्ष-प्रतिपक्ष दोनों मिलकर प्रेस को निपटाने में लगे हैं। विनोद वर्मा उत्पीडन का अगला पायदान गौरी लंकेश और शांतनु है, जिस पर हम कलमनवीसों को गंभीरता से सोचना होगा। पत्रकार के पक्ष में कोई कभी नहीं रहा है, अब तो उम्मीद और भी व्यर्थ है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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