Madhya Pradesh: कलेक्टर के आर्डर को स्टे करने के कारण प्रधान जिला न्यायाधीश सस्पेंड

Updesh Awasthee
जबलपुर, 21 नवंबर
: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पन्ना जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजाराम भारतीय को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर श्री सुरेश कुमार के आदेश को स्थगित कर दिए जाने के कारण यह कार्रवाई हुई। एक शिकायत में जिला जज श्री राजाराम भारतीय पर गंभीर आरोप लगाए गए एवं हाईकोर्ट ने पाया कि निष्पक्ष जांच के लिए श्री राजाराम को पद से हटाया जाना जरूरी है।

कांग्रेस नेता के लिए क्षेत्राधिकार की सीमा का उल्लंघन कर दिया

गुरुवार को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने निलंबन आदेश जारी कर न्यायाधीश राजाराम भारतीय को सभी न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों से स्थगित कर दिया है एवं उनके स्थान पर पन्ना के एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज प्रदीप कुशवाह को आगामी आदेश तक प्रधान जिला न्यायाधीश का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। बताया गया है कि पन्ना के कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित के खिलाफ अवैध खनन मामले में जिला कलेक्टर ने श्रीकांत दीक्षित पर करीब 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए कार्रवाई की थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजाराम भारतीय ने इस कार्रवाई पर स्टे आर्डर जारी कर दिया था। 

क्षेत्राधिकार की सीमा ​निलंबन का कारण

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रशासनिक/राजस्व कार्रवाई (जैसे कलेक्टर द्वारा अवैध खनन के लिए लगाया गया जुर्माना या जब्ती आदि) पर स्टे/अंतरिम राहत देने का सीमित अधिकार है। खनन से संबंधित जुर्माना/पेनल्टी लगाने की शक्ति, मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का प्रतिषेध) नियम, 2022 या MMDR Act, 1957 के तहत कलेक्टर/अधिकृत अधिकारी को मिली होती है। यह प्रशासनिक/राजस्व कार्रवाई होती है, जिसे सामान्यतः सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती (MMDR Act की धारा 22 में स्पष्ट प्रतिबंध है)। 
 
सिविल कोर्ट (जिसमें सिविल जज व सेशंस जज के सिविल पक्ष का क्षेत्राधिकार भी आता है) को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने से विशेष रूप से वर्जित किया गया है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय  सुप्रीम कोर्ट ने State of MP vs. Khan Minerals (2015) और कई अन्य मामलों में स्पष्ट किया है कि MMDR Act के तहत लगाई गई पेनल्टी/जुर्माने को सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, न ही उस पर स्टे दिया जा सकता है। अनुच्छेद 226/227 के तहत, केवल हाईकोर्ट या निर्धारित अपील प्राधिकारी (जैसे खनिज सांड़सी अधिकारी या राज्य सरकार) के पास ही ऐसे आदेशों को चुनौती देने का अधिकार है।

इसलिए श्री राजाराम भारतीय द्वारा कलेक्टर के आदेश को स्टे कर देना क्षेत्राधिकार से बाहर (without jurisdiction) माना जा सकता है। यही कारण है कि हाईकोर्ट ने इसे गंभीर अनियमितता/कदाचार माना और तुरंत निलंबन का आदेश दिया।


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