जबलपुर, 28 नवंबर 2025: मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित सरकारी स्कूलों में तैनात 27 शिक्षकों द्वारा हमारे शिक्षक मोबाइल एप्लीकेशन के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर, टेक्निकल ग्राउंड पर लड़ाई शुरू हो गई है। शिक्षकों ने मोबाइल एप्लीकेशन की सिक्योरिटी को चैलेंज किया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है। अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
कुछ मामलों में बैंक खातों से पैसे तक निकल गए
सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से संशोधन आवेदन पेश किया गया। इसमें बताया गया कि सरकार द्वारा जारी ऐप सही तरीके से काम नहीं करता और तकनीकी तौर पर कमजोर है। शिक्षकों ने कहा कि ऐप के कारण कई बार डेटा चोरी हुआ और कुछ मामलों में बैंक खातों से पैसे तक निकल गए। शिक्षकों ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में 5–6 शिक्षकों के खातों से रुपए निकाल लिए गए और उनकी निजी जानकारी लीक हुई। कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत करते हुए पत्र भी लिखे। DPI ने इन शिकायतों को स्वीकार करते हुए माना कि कुछ शिक्षकों के साथ फ्रॉड की घटनाएं हुई हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।
टेक्निकल ग्राउंड पर लड़ाई का मतलब क्या हुआ
याचिका में शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि हमारे शिक्षक मोबाइल एप्लीकेशन के कारण कुछ शिक्षकों का मोबाइल हैक हो गया और उनके बैंक के अकाउंट से उनकी मर्जी के बिना पैसे ट्रांसफर हो गए। अपने पक्ष के समर्थन में शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय को लिखे गए पत्र और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी की गई एडवाइजरी को प्रस्तुत किया है।
अब हमारे शिक्षक मोबाइल एप्लीकेशन पर इस प्रकार का आरोप लगाने वाले शिक्षकों को टेक्निकल ग्राउंड पर अपना आरोप साबित करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी या आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, तकनीकी अधिकारी नहीं होते। वह साइबर सिक्योरिटी के बारे में नहीं जानते। उन्होंने पत्र लिखने से पहले या फिर एडवाइजरी जारी करने से पहले किसी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी से परामर्श नहीं लिया। इसलिए उनके डॉक्यूमेंट की कोई वैल्यू नहीं है।
आरोप: शिक्षकों ने अपने हलफनामे में कहा कि ऐप में तकनीकी खराबी, नेटवर्क एरर और सर्वर डाउन जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं।
जवाब: राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा है कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐप के लिए डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया गया है और न तो सर्वर की समस्या है, न नेटवर्क की।
इस मुद्दे में दम है
याचिकाकर्ताओं के वकील अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है और वही संस्था शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है। केंद्र सरकार के निजी डेटा कलेक्शन नियम इस पर लागू होते हैं, पर ऐप में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
बता दें जबलपुर के शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित विभिन्न जिलों के 27 शिक्षकों ने यह याचिका दायर की है। उनका कहना है कि ‘हमारे शिक्षक’ ऐप से रोजाना उपस्थिति दर्ज करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि ऐप में कई तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें हैं।
.webp)