सरनेम बदलकर फंस गया दलित छात्र

0
मुंबई। एसटी वर्ग के एक छात्र ने कुछ समय पहले अपना सरनेम बदल कर भारद्वाज कर लिया। बस फिर क्या था, उसके संकट का समय शुरू हो गया। वो भारद्वाज सरनेम के साथ आरक्षण के लाभ लेना चाहता था परंतु कॉलेज प्रबंधन ने उसे एसटी वर्ग का अभ्यर्थी मानने से ही इंकार कर दिया। वो तमाम दस्तावेजों की फाइल लेकर यहां वहां दौड़ता रहा परंतु किसी ने उसकी एक ना सुनी। 

कॉलेज के प्रिंसिपल से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक किसी ने भी शांतनु हरि भारद्वाज को एसटी वर्ग में मानने से इंकार कर दिया जबकि उसके पास इस बात के पर्याप्त दस्तावेज थे कि वो एसटी वर्ग से आता है और कुछ समय पहले ही उसने सभी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए अपना सरनेम बदला है। 

अंतत: छात्र शांतनु हरि भारद्वाज को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यहां उसके तमाम दस्तावेजों की पड़ताल हुई। उसके वकीलों ने लम्बी जिरह की तब कहीं जाकर उसे एसटी वर्ग का माना गया। हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ में जस्टिस शालिनी फन्साल्कर जोशी और जस्टिस बीआर गवई ने आदेशित किया है कि शांतनु हरि भारद्वाज को कॉलेज में एसटी वर्ग की सुविधाएं दी जाएं परंतु समस्याएं अभी भी समाप्त नहीं हुईं है। कॉलेज के बाद भी लंबी जिंदगी बाकी है और हर कदम पर शांतनु हरि भारद्वाज को यह प्रमाणित करना होगा कि वो एसटी वर्ग से आता है। इस मामले के लेकर सोशल मीडिया पर खासी प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। ज्यादातर लोग सवाल कर रहे हैं कि शांतनु को जरूरत क्या थी कि उसने अपना सरनेम बदल दिया। उसका अपना सरनेम क्या बुरा था। 
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

Post a Comment

0 Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!