इंदौर। यह साल जाते-जाते शहरवासियों की एक बुरी छाप छोड़कर जा रहा है। बड़े दिल वाला इंदौर बेटियों को पसंद नहीं करता। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि प्रदेश के सबसे खराब लिंगानुपात वाले जिलों में इंदौर भी शामिल है। यहां 1000 बेटों के मुकाबले 901 बेटियां हैं, जबकि मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 918 है और आदर्श स्थिति 952 की है। पीसीपीएनडीटी की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
बेटियों के जन्म के मामले में जिले की स्थिति चिंताजनक है। पिछले कुछ सालों में लिंगानुपात बढ़ा तो है, लेकिन आदर्श स्थिति तक पहुंचने के करीब नहीं पहुंचा है। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी की कार्यशाला में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में 16 ऐसे जिले बताए गए जहां बेटियों के अस्तित्व को लेकर चिंता की स्थिति बनी हुई है।
इनमें इंदौर का होना आश्चर्यजनक है, क्योंकि भौगोलिक और शिक्षा स्तर के लिहाज से यही सबसे अच्छा जिला है। भोपाल के अफसरों ने स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन को सोनोग्राफी सेंटरों पर विशेष निगरानी रखने की हिदायत दी है। कार्यशाला में बताया गया कि 1 जनवरी से सोनोलॉजिस्ट का ऑनलाइन पंजीयन किया जाएगा। डॉ. शरद पंडित, डॉ.वंदना शर्मा, डॉ.स्वाति सिंह, डॉ. सुमित्रा यादव, मुकेश सिन्हा आदि उपस्थित थे।
ज्यादा पढ़े-लिखे लोग बेटियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। शहर में जितना साक्षरता का प्रतिशत बढ़ रहा है उतनी संवदेनशीलता कम हो रही है। शिक्षित लोग सामान्य तौर पर एक ही संतान चाहते हैं या पहली बेटी होने पर दूसरा बेटा चाहते हैं। ऐसे में वे कई तरह के रास्ते अपनाते है। उल्टे रास्ते जाकर लिंगानुपात को प्रभावित करते हैं। छोटे जिलों और गांवों में लोगों में कम समझ होने से वे इस तरह के रास्ते नहीं अपना पाते।
इन जिलों में सबसे खराब स्थिति
ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, गुना, श्योपुर, दतिया, इंदौर, सीहोर, नरसिंहपुर, छतरपुर, सतना, पन्नाा, रीवा, सीधी और टीकमगढ़।
लिंगानुपात में इंदौर से अच्छा अलीराजपुर
इंदौर 901, बड़वानी 948, अलीराजपुर 978, धार 928, खंडवा 932, खरगोन 938, झाबुआ 943 और बड़वानी 948
(लिंगानुपात की स्थिति प्रति 1000 लड़कों पर)
