ग्वालियर। ग्राम रक्षा समिति के संयोजक हरीश शर्मा की संपत्ति को राजसात किया जा रहा है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग को एक प्रस्ताव भेज दिया गया है और राजसात की अनुमति मांगी गई है। ग्राम रक्षा समिति के संयोजक ने अपने पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार करके करीब 2 करोड़ 44 लाख की संपत्ति जुटाई थी। लोकायुक्त छापे के दौरान संयोजक के घर से संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए थे। वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के लिए बने कानून के बाद लोकायुक्त ग्वालियर पहली बार भ्रष्ट अधिकारी की संपत्ति राजसात करने जा रही है।
अनुपातहीन संपत्ति की शिकायत आने पर 13 जून 2008 को लोकायुक्त ने हरीश शर्मा के यहां छापा मारा था। उसके घर से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज व बैंक खाते, पॉलिसियां बरामद की थीं। वर्ष 2010 में लोकायुक्त ने उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया था। आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले में हरीश शर्मा के खिलाफ ट्रायल चल रही है, लेकिन उसकी संपत्ति को राजसात करने पर कोई फैसला नहीं हो पाया था। 12 जून 2015 व 1 जुलाई 2015 को संपत्ति राजसात का प्रस्ताव मांगा गया था। लोकायुक्त ने ग्राम रक्षा समिति के संयोजक की संपत्ति राजसात करने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन उसे भेजा नहीं गया था। हाल ही में लोकायुक्त के आईजी ने राजसात के प्रकरण में ढिलाई बरतने को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी, जिसके चलते लोकायुक्त ने प्रस्ताव तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है।
- इन संपत्तियों को किया जाएगा राजसात
- ग्राम रक्षा समिति के संयोजक ने प्रॉपर्टी में अधिक निवेश किया है। कृषि भूमि डोंगरपुर, जीवाजी नगर में मकान, सुंदर अपार्टमेंट में भवन, पंतनगर में प्लॉट, ग्राम रमटापुरा में संपत्ति, न्यू सिटी सेंटर महलगांव में प्लॉट क्रमांक 430,426, पंतनगर में प्लॉट क्रमांक 19, ग्राम मेहरा में सर्वे क्रमांक 276,284 की जमीन, मकान क्रमांक 20/1351 नौलखा परेड, गोविंदपुरी, आनंद नगर श्योपुर में प्लॉट क्रमांक 10 व 11 अचल संपत्ति को राजसात किया जाएगा।
- बैंक खाते व पॉलिसियों में लगभग 35 लाख रुपए जमा हैं, जिसे राजसात किया जाएगा। यह नकदी लोकायुक्त के खुद के, पत्नी व अन्य आश्रितों के खाते में जमा है।
- राज्य सरकार ने वर्ष 2011 में बनाया था संपत्ति राजसात का कानून
- राज्य सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति को राजसात करने का कानून वर्ष 2011 में बनाया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने ग्वालियर में समिति प्रबंधक बलभद्र पारासर की 3 करोड़ की संपत्ति राजसात की थी, लेकिन लोकायुक्त ने किसी भी भ्रष्ट अधिकारी पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की।
- वर्ष 2011 के कानून के अनुसार अनुपातहीन संपत्ति जुटाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया जाता है। उसके बाद राजसात की कार्रवाई की जाती है, लेकिन लोकायुक्त राजसात की कार्रवाई नहीं कर पाई थी।
- वर्ष 2011 में बने कानून को सुप्रीम कोर्ट भी वैध ठहरा चुका है। बलभद्र पारासर की अपील को खारिज करते हुए भ्रष्टाचार के लिए गठित विशेष न्यायालयों को सही माना है।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही राजसात की कार्रवाई को बल मिला है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बलभद्र पारासर की अपील में अभियोजन की स्वीकृति को भी सही माना है, जिसे भ्रष्ट अधिकारी चुनौती दे रहे थे।
