मप्र में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नहीं होगी लम्बी वेटिंग

Updesh Awasthee
जबलपुर। आरटीओ को 15 दिन में ड्राइविंग लाइसेंस और 30 दिन में रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाकर आवेदकों के घर भेजना होगा। इस अवधि में लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड नहीं बनाए गए तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

लोकसेवा गारंटी अधिनियम 2010 में शामिल हो चुकी इन सेवाओं का लाभ जनता को समय-सीमा में मिले इसके लिए परिवहन विभाग ने मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी तय कर दी है। तय समय-सीमा में काम न होने पर आवेदक कलेक्टर व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से शिकायत कर सकते हैं।

30 दिन में मिलेंगे बसों के परमिट
लोकसेवा अधिनियम में परमिट सेवा को भी हाल ही में शामिल किया गया है। 5 नवम्बर को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसमें संभाग स्तर में बसों के परमिट की सुनवाई करने के लिए तीन सदस्यीय रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को खत्म कर 30 दिन के भीतर परमिट जारी करने के पूरे अधिकार डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) को दे दिए गए हैं। जबकि परिवहन विभाग की सेवाओं की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी भी डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर दी गई है।

अभी ऐसा हो रहा
पक्के लाइसेंस बनने में लग रहे 15 से 20 दिन
पोस्ट ऑफिस से अनुबंध होने के बाद भी एक माह तक नहीं पहुंच पा रहे लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड।
बसों के परमिट जारी करने में लगते हैं 6 से 8 माह

अब ऐसा होगा
लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड, फिटनेस सर्टिफिकेट तय समय-सीमा में बनाकर देना होगा।
रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर परमिट आवेदनों की कर सकेंगे सुनवाई।
एक महीने के भीतर जारी होंगे अस्थाई, स्थाई परमिट।

लोकसेवा केन्द्र में नहीं ले रहे आवेदन
लोकसेवा गारंटी अधिनियम में विभिन्न विभागों की 62 सेवाएं शामिल हैं।
लोकसेवा केन्द्र के संचालक की मानें तो परिवहन विभाग की सेवाएं शामिल नहीं।

लोकसेवा गांरटी अधिनियम के तहत समय सीमा में लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड के प्रकरणों का निराकरण करना होगा। स्थाई और स्थाई परमिट को भी इसमें शामिल किया गया है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नरों को रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के रूप में मामलों के निराकरण और मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। 
डॉ.शैलेन्द्र श्रीवास्तव, परिवहन आयुक्त

लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन कार्ड के प्रकरणों का निराकरण समय में कर रहे। लेकिन पोस्ट ऑफिस से डिस्पेच में समय लग रहा है। सख्ती से मॉनीटरिंग की जाएगी।
जितेन्द्र सिंह रघुवंशी, आरटीओ

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