नंदूभैया ने दिग्विजय सिंह से कहा: सरेंडर कर दो

Updesh Awasthee
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री नंदकुमारसिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह विधानसभा में उनकी और तत्कालीन अध्यक्ष श्री श्रीनिवास तिवारी की मिलीभगत से की गयी मनमानी नियुक्तियों के संबंध में जो भी सफाई देते रहें, लेकिन उनका झूठ और फरेब इतना साफ दिखाई देता है कि बचाव की कोई गुंजाइश नहीं है। जनता उनसे अपेक्षा करती है कि वे भी अपने पद की गरिमा के अनुकूल उन पर लगे अनियमितताओं के आरोपों का मर्यादा के भीतर इस तरह से कानून के सामने पेश आए कि स्वतंत्र भारत में एक उदाहरण बन सके।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री निवास तिवारी को निजी स्थापना में नियुक्तियां करने का अधिकार रहा है, परंतु नियुक्तियों की भी एक प्रणाली, कानून स्वरूप और मर्यादा होती है। निजी स्थापना में की गयी नियुक्तियां स्थायित्व और नियमितता का लायसेंस नहीं होती। कार्यकाल समाप्त होने के साथ नियुक्तियां विशुद्ध अस्थायी की तरह समाप्त हो जाती है, लेकिन श्री दिग्विजय सिंह और श्री निवास तिवारी ने निजी स्थापना में हुई नियुक्तियो को अनियमित रूप से उन्हें निरंतरता बनाए रखकर उनकी नियुक्तियों को अग्रेषित करते हुए सेवा पुस्तिका बनाकर प्रतिनियुक्ति अनियमित ढंग से आगे बढ़ाकर कानून के साथ फरेब किया। यह घोर अनियमितता है। विधानसभा में इस तरह की कथित फर्जी नियुक्तियों को संज्ञान में लिया जा चुका है और 17 मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में फर्जी नियुक्तियों के मामलों में से 17 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है जिनमें श्री सत्यनारायण शर्मा को एक सादे आवेदन पत्र पर निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर नियुक्ति दी गयी जिनकी शैक्षणिक योग्यता मात्र हायर सेकेण्डरी थी। वास्तविकता को छुपाते हुये श्री शर्मा का बाद में नगर पालिका कटनी में राजस्व निरीक्षक आगे चलकर उन्हें विधानसभा सचिवालय में अवर सचिव से जिला आबकारी अधिकारी के पद पर संविलियन करा दिया गया। श्री कमलाकांत शर्मा-विधानसभा सचिवालय सहायक पद से नगरपालिका कटनी में राजस्व निरीक्षक के पद पर संविलियन उसके बाद विधानसभा सचिवालय सहायक संचालक पद से खाद्य विभाग में खाद्य अधिकारी के पद पर संविलियन बाद में खाद्य अधिकारी के रूप में सतना पदस्थ किया गया। इसके बाद उन्हें विधानसभा सचिवालय में अवर सचिव से महिला एवं बाल विकास विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। श्री प्रदीप मिश्रा-साधारण आवेदन पर विधानसभा सचिवालय जनसंपर्क अधिकारी से राजीव गांधी प्राथमिक शिक्षा मिशन में जिला परियोजना समन्वयक, रीवा प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया । 

उन्हें विधानसभा सचिवालय उप सचिव से स्कूल शिक्षा विभाग में उप संचालक के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया फिर उन्हें  जिला शिक्षा अधिकारी रीवा पदस्थ किया गया। श्रीमति आभा चतुर्वेदी-साधारण आवेदन पर अध्यक्ष की निजी स्थापना में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर अस्थायी नियुक्त की गयी। इसके बाद वास्तिवक तथ्यों को छुपाते हुये विधानसभा सचिवालय का निम्न श्रेणी लिपिक बताकर सुनियोजित तरीके से स्कूल शिक्षा विभाग में निम्न श्रेणी शिक्षक के पद पर संविलियन कराया गया। अमित कुमार अवस्थी-साधारण आवेदन पर मा. अ. की निजी स्थापना में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर अस्थायी नियुक्त की गयी । इसके बाद वास्तिवक तथ्यों को छुपाते हुये विधानसभा सचिवालय का निम्न श्रेणी लिपिक बताकर सुनियोजित तरीके से स्कूल शिक्षा विभाग में निम्न श्रेणी शिक्षक के पद पर संविलियन कराया गया। श्री ब्रम्हचारी प्रसाद-विधानसभा सचिवालय सहायक वर्ग तीन से नगर पंचायत गोविन्दगढ़ रीवा में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर संविलियन। श्री राजेश प्रसाद द्विवेदी-विधानसभा सचिवालय उपयंत्री से नगर पंचायत मनगंवा रीवा में उपयंत्री के पद पर संविलियन किया गया।

उन्होंने कहा कि श्री अरूण कुमार तिवारी-विधानसभा सचिवालय उपयंत्री से प्रतिनियुक्ति की सेवाएं वापिस लेते हुये खनिज अधिकारी के पद पर संविलियन किया गया। श्रीशुक्रमणि प्रसाद मिश्रा-साधारण आवेदन पर मा. अध्यक्ष की निजी स्थापना में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर अस्थायी नियुक्त की गयी। इसके बाद वास्तिवक तथ्यों को छुपाते हुये विधानसभा सचिवालय का निम्न श्रेणी लिपिक बताकर सुनियोजित तरीके से सिंचाई विभाग में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर संविलियन कराया गया। श्री शरद कुमार द्विवेदी- विधानसभा सचिवालय निम्न श्रेणी लिपिक से स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति । निम्न श्रेणी लिपिक पद से सहायक शिक्षक पद पर परिवर्तन। श्री सुधीर कुमार तिवारी-साधारण आवेदन पर मा. अध्यक्ष की निजी स्थापना में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर अस्थायी नियुक्त की गयी। इसके बाद वास्तिवक तथ्यों को छुपाते हुये विधानसभा सचिवालय का निम्न श्रेणी लिपिक बताकर सुनियोजित तरीके से स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के पद पर संविलियन कराया गया।

श्री नंदकुमारसिंह चौहान ने कहा कि श्री अनिल कुमार मिश्रा- विधानसभा सचिवालय के सहायक मार्शल दर्शाकर स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गयी। श्री कुलदीप पांडे- सहायक मार्शल विधानसभा सचिवालय से भर्ती नियमों को शिथिल कर विशेष प्रकरण बताकर स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन। श्री देवेन्द्र तिवारी-विधानसभा सचिवालय उपयंत्री से लोक निर्माण विभाग में संविलियन किया गया। विधानसभा सचिवालय पर्यवेक्षण अधिकारी तकनीकी से राजधानी परियोजना प्रशासन उपयंत्री के पद पर प्रतिनियुक्ति। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग में सहायक यंत्री पद पर प्रतिनियुक्ति। श्री रमेश तिवारी- विधानसभा सचिवालय पर्यवेक्षण तकनीकी से स्थानीय शासन विभाग में कार्यालय उप संचालक नगर प्रशासन रीवा में सहायक यंत्री के पद पर प्रतिनियुक्ति। डॉ. ए.के. प्यासी-उपायुक्त नगर निगम भोपाल से अवर सचिव विधानसभा सचिवालय में प्रतिनियुक्ति। इसके बाद लगातार पदोन्नति होते हुये विधानसभा के प्रमुख सचिव पद तक पहुंचे। श्री यज्ञनारायण शर्मा-साधारण आवेदन पर अध्यक्ष की निजी स्थापना में निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर अस्थायी नियुक्त की गयी । इसके बाद वास्तिवक तथ्यों को छुपाते हुये इनको भी विधानसभा सचिवालय का निम्न श्रेणी लिपिक बताकर सुनियोजित तरीके से स्कूल शिक्षा विभाग में निम्न श्रेणी शिक्षक के पद पर संविलियन कराया गया।

इसी तरह विधानसभा सचिवालय में नौकरी विधानसभा सचिवालय भर्ती नियम के तहत दी जाती है। दोनो महानुभावों ने इन सारे नियमों को धता बताते हुये मनमाने ढंग से रेवड़ी की तरह अपने चहेते अपात्र लोगों को नौकरियां बांटी। अनेक प्रकरणों में मुख्यमंत्री के रूप में श्री दिग्विजय सिंह ने कुछ लोगो को नौकरी में रखने का सीधा निर्देश दे दिया तो कुछ प्रकरणों में सादे आवेदन पर ही बिना वांछित योग्यता वाले लोगों को नौकरियां दे दी गयी। श्री दिग्विजय सिंह ने किन्हीं किन्हीं प्रकरणों में सादे कागज पर दिये हुये आवेदन पर ही नौकरी की सिफारिश कर दी। इस तरह की भर्राशाही को हाईकोर्ट ने भी गलत पाया है। श्री दिग्विजय सिंह कितनी भी सफाई देते रहे कि उन्होंने की गयी नियुक्तियों का केबिनेट से अनुमोदन कराया है, लेकिन सभी मामलों में ऐसा नहीं है।

वैसे तो अन्य मामलों की तरह ही इस मामलें मे भी कानून अपना काम करेगा। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। निश्चय ही श्री दिग्विजय सिंह और श्री निवास तिवारी द्वारा मनमाने ढंग से अपात्र लोगों को नौकरी देकर पात्र और योग्य युवाओं का अधिकार छिनने के आपराधिक कृत्य की सजा मिलेगी। राजनीतिक सजा तो उन्हें मिल ही रही है। कांग्रेस का बहुत तेजी से पूरे देश में सफाया हो रहा है । यह श्री दिग्विजय सिंह और श्री श्रीनिवास तिवारी जैसे सामन्ती प्रवृत्ति लोगों के कुकृत्यों का ही परिणाम है कि कांग्रेस आज मरणासन्न में पड़ी है।
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