भोपाल। सरकारी वकील ने हाईकोर्ट में टीनू जोशी की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि टीनू जोशी का कोई स्थाई पता नहीं है। दस्तावेजों में जो दर्ज है वो नकली है। यदि जमानत दी तो फिर से भाग जाएंगी। याद दिला दें कि आॅपरेशन के बहाने जमानत लेकर एक बार पहले भी टीनू जोशी फरार हो चुकी है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आय से अधिक अनुपातहीन संपत्ति के मामले में आरोपी बर्खास्त आईएएस अफसर टीनू जोशी की जमानत नामंजूर कर दी। जस्टिस शांतनु केमकर की एकलपीठ ने कहा कि टीनू और उसके पति अरविंद जोशी ने जनता के लिए काम करने के बजाए भ्रष्ट आचरण के जरिए अकूत संपत्ति जमा की। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आज समाज के लिए नासूर बन गया है। आवेदिका का आरोपी पति लंबे समय से फरार है और टीनू ने पूर्व में दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है। ऐसी स्थिति में जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
टीनू जोशी की ओर से दलील दी गई कि लोकायुक्त ने उसके खिलाफ 4 मार्च को ट्रायल कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। आवेदिका पिछले चार माह से जेल में है और ट्रायल पूरी होने में समय लगेगा, इसलिए उसे जमानत का लाभ दे दिया जाए। लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने कहा कि आवेदिका ने पहले सर्जरी का बहाना बनाकर अस्थाई जमानत ली थी, लेकिन इलाज नहीं कराया।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि टीनू ने अपने निवास का सही पता नहीं दिया है, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाए। लोकायुक्त ने वर्ष 2010 में वरिष्ठ आईएएस अफसर अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू के घर पर छापा मारा था, जिसमें करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने दोनों के खिलाफ भादंवि की धारा 467, 120बी, 109, 468 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) एवं 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था।
इसके पहले जनवरी में टीनू ने गंभीर बीमारी को आधार बनाते हुए जमानत अर्जी दायर की थी। टीनू ने कहा था कि उन्हें सर्जरी कराना है। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2015 को टीनू को तीन माह के लिए अस्थाई जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि तीन माह की अवधि पूरी होते ही आवेदिका ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करेंगी।

