शंकरदयाल शर्मा: जिनके लिए शिवराज के पास ना वक्त है ना पैसा

17 August 2015

भोपाल। आजादी के पहले भोपाल प्रदेश के आखरी मुख्यमंत्री, भारत के 9वें राष्ट्रपति एवं कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले भोपाल के गौवर शंकरदयाल शर्मा का जन्मदिवस 19 अगस्त को है परंतु इसके लिए शिवराज सरकार के पास ना वक्त है ना पैसा। उनके जन्मदिवस पर श्रृद्धा के 2 फूल भी नहीं चढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अफसरों के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें मप्र सरकार के खर्चे पर एक छोटा सा आयोजन करने का सुझाव दिया गया था। 

शंकर दयाल शर्मा का जन्म भोपाल में हुआ था। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य में एमए करने के बाद एलएलएम किया और फिर कैम्ब्रिज विवि से लॉ में पीएचडी की। 1940 में वे स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े और कांग्रेस की सदस्यता ली। 1952 में वे भोपाल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 1956 में मप्र बनने तक मुख्यमंत्री रहे। वे 1972 से 1974 तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इंदिरा गांधी के मंत्रीमंडल में वे संचार मंत्री भी रहे। कहते हैं नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाए जाने से पहले यह आॅफर शंकरदयाल शर्मा को दिया गया था परंतु उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के चलते इससे इंकार कर दिया था। श्री शर्मा को एक दृढ़ धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में याद किया जाता है। जो कांग्रेस में कांग्रेसियों से कहीं ज्यादा दृढ़ संकल्पित रहे। 26 दिसंबर 1999 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया था। 

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