प्रयागराज, 20 जनवरी 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में बयान और सबूत के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के बयान में कोई एक बात गलत है, तो इसके आधार पर उसका पूरा बयान खारिज नहीं कर सकते। इसी के साथ हाई कोर्ट ने अपराधी की जमानत निरस्त कर दी और उसे जेल जाने का आदेश दिया।
गवाह गलत तो क्या सबूत तो सही है
यह मामला सहारनपुर में 39 साल पहले हुई एक हत्या का है। ट्रायल कोर्ट द्वारा हत्या के आरोपी को अपराधी घोषित करके सजा निर्धारित कर दी गई थी। हत्या के 1 अपराधी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके बताया कि, मुख्य गवाह द्वारा दिए गए बयान में एक बड़ी गलती है। इसके आधार पर उसने सजा को खारिज करने का निवेदन किया। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने याचिका की अंतिम सुनवाई के बाद फैसला देते हुए कहा कि, अपराधी के खिलाफ पर्याप्त सबूत और गवाह उपस्थित हैं। किसी एक गवाह के बयान में एक बड़ी गलती हो जाने के कारण, उसके पूरे बयान को खारिज नहीं कर सकते और अपराधी को निर्दोष घोषित नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने अपराधी को आदेश दिया कि वह 25 फरवरी तक ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करेगा। अपराधी को ट्रायल कोर्ट द्वारा उम्र कैद की सजा दी गई है। ट्रायल कोर्ट द्वारा उसको जेल भेजा जाएगा और हत्यारे को अपनी सजा पूरी भोगनी होगी।
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