जबलपुर, 20 जनवरी 2026: हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव से पूछा है कि, आपका डिपार्टमेंट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तृतीय श्रेणी कर्मचारी क्यों नहीं मानता। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अपना उत्तर प्रस्तुत करने के लिए प्रमुख सचिव को चार सप्ताह का समय दिया है। जस्टिस विशाल धगट, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघ की याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की याचिका
मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की महासचिव संगीता श्रीवास्तव की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दशकों से राज्य को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएँ मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का संचालन कर रही हैं। राज्य शासन द्वारा इन कार्यकर्ताओं को शासकीय सेवक की तरह अतिरिक्त कार्यबल के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें बी.एल.ओ., जनगणना जैसे अतिरिक्त कर्तव्यों का दायित्व दिया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित कैडर सृजित नहीं करते हुए उनका शोषण किया जा रहा है। सरकार इनसे स्थायी कार्य तो ले रही है, लेकिन अधिकार देने से बच रही है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित कैडर के सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाओं और लाभों के हकदार हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समान हक और वेतन की मांग
याचिका में राहत चाही गई कि समान काम हेतु समान वेतनमान का हक प्रदान करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएँ जैसे नियमित वेतन, वेतन वृद्धि, अवकाश सुविधाएँ, टीए, डी.ए., एच.आर.ए. आदि प्रदान की जाएँ, क्योंकि राज्य शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश के भाग तीन और भाग चार में इन सुविधाओं का आश्वासन दिया गया है। राज्य को उनकी सेवाओं की नियमित आवश्यकता है, लेकिन इनके लिए नियमित कैडर सृजित नहीं कर उनका शोषण किया जा रहा है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली और अधिवक्ता अहमद साजिद हुसैन ने पक्ष रखा।
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